एक साल से भी कम समय पहले प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष बने सांसद केशव प्रसाद मौर्य को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सार्वजनिक मंचों पर युवा प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर संबोधित करते हैं। केशव चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद से 200 से अधिक चुनावी सभाएं कर चुके हैं। हमेशा मुस्कराने वाले मौर्य को उनकी पार्टी और सहयोगी दलों के नेता भावी मुख्यमंत्री मानने-कहने लगे हैं।
इन दिनों मौर्य ने वाराणसी को अपना केंद्र बना लिया है। रोजाना तीन-चार जिलों में चुनावी सभाएं करते हैं। मोदी सरकार की नीतियों के बारे में बताना उनका प्रमुख एजेंडा रहता है। बुधवार को मौर्य ने चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर जिलों में सात सभाओं को संबोधित किया।
इसी चुनावी दौरे के बीच उन्होंने अमर उजाला से खास बातचीत की। उन्होंने फिर दोहराया कि 11 मार्च को वह भाजपा की झोली में 300 से ज्यादा सीटें डाल देंगे। प्रस्तुत हैं सिलसिलेवार बातचीत के विशेष अंश...।
सवालः भाजपा की जीत के लिए पांच ऐसे कौन से प्रमुख कारण हैं जिनके आधार पर यह दावा कर रहे हैं?
केशवः प्रदेश के प्रबुद्ध मतदाता केंद्र की भाजपा सरकार के विकास मॉडल को बखूबी जानते हैं। उन्हें पता है कि प्रदेश में भी भाजपा की सरकार बनने पर ही राज्य का विकास होगा। भाजपा सत्ता का सदुपयोग करेगी क्योंकि भाजपा के लिए सरकार में पहुंचने का मतलब सेवा का सुनहरा अवसर है। ध्वस्त कानून व्यवस्था से निजात पाना प्रदेश के लोगों का सपना है। यूपी में किसान बदहाल हैं।
कृषि विकास दर तीन फीसदी पर सिमट गई है। कर्ज माफी और कम ब्याज दरों पर कर्ज देकर हम उन्हें उबारेंगे। रोजगार के अवसर बढ़ाकर हम 90 फीसदी नौकरियां प्रदेश के युवाओं को देना सुनिश्चित करेंगे। इसके अलावा पिछड़ों और दलितों में अंडर करेंट हमें जीत दिला रहा है।
सवालः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियां जीत के लिए कितना और कैसे आश्वस्त करती हैं?
केशवः इसमें तनिक भी संदेह नहीं है कि हम मोदी जी के बगैर कोई मिशन पूरा कर सकते हैं। हम उन्हीं के सपनों और उम्मीदों के सहारे हर मुश्किल से जूझ रहे हैं। हम इसलिए अपनी हर सभा में कहते हैं- विश्वास करो तुम मोदी पर वह युग निर्माता है, ऐसा पुरुष इस धरती पर एक बार ही आता है।
हम उन्हीं के मार्गदर्शन में चुनाव लड़ रहे हैं।
सवालः पिछड़े सपा और दलित बसपा के परंपरागत वोटर माने जाते हैं। इन्हें अपने पक्ष में करने के बारे में आप कैसे सोच रहे हैं?
केशवः दरअसल, भाजपा अब अगड़ों की ही पार्टी नहीं है। 14 साल के सपा-बसपा के शासनकाल में उनके समझे जाने वाले मतदाता अपने साथ हुए छल को समझ गए हैं। ओबीसी जो सपा के साथ माने जाते थे, उन्हें पता चल गया है कि पांच साल में केवल एक जाति और जिला विशेष के समर्थ लोगों को ही नौकरियां बेची गई हैं। आधे से ज्यादा दलित भी इन्हीं परिस्थितियों से जूझने के बाद हमारे साथ आ गए हैं।
सपा और बसपा ने मुस्लिम तुष्टीकरण किया है, जबकि भाजपा सबका साथ-सबका विकास तो करेगी ही, उसके राज में गरीब को गरीब माना जाएगा। हिंदू और मुसलमान के नाम पर भेदभाव नहीं किया जाएगा।