अजन्मी बेटियों के मोक्ष के लिए किया श्राद्ध
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संस्था के संस्थापक सचिव डॉ. संतोष ओझा ने बताया कि 9 वर्षों से अजन्मी बेटियों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध का आयोजन करते आ रहे हैं। संस्था मानना है कि गर्भपात महज एक ऑपरेशन नहीं बल्कि हत्या है। ऐसे में कोख में मारी गई उन बेटियों को भी मोक्ष मिले और समाज से ये कुरीति दूर हो इसके लिए हम लोग ये आयोजन करते हैं।
सोमवार को दशाश्वमेध घाट पर श्राद्ध क्रम की शुरुआत शांति वाचन से हुआ जिसके बाद अलग- अलग 13 हजार अनाम, ज्ञात और अज्ञात बेटियों के पिंड को स्थापित कर विधिपूर्वक आह्वान कर पूजा अर्चन कर उनके मोक्ष की कामना की गई। गंगा की मध्य धारा में पिंड विसर्जन के बाद सभी को जल अर्पित कर तृप्त होने का निवेदन किया गया।
पितृ पक्ष की नवमी तिथि मातृ शक्ति के लिए जानी जाती है। इसलिए मातृशक्ति को नमन करते हुए कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ विशेष आयोजन काशी में किया गया। माना जाता है कि भ्रूण में प्राण वायु आने के बाद हुआ गर्भपात जीव ह्त्या है। उन्हीं अजन्मी अतृप्त आत्माओं को सदगति प्रदान करने के लिए वैदिक ब्राम्हणों के आचार्यत्व में शास्त्रीय रीतियों से सोमवार दोपहर दशाश्वमेध घाट पर श्राद्ध कर्म आयोजित किया गया।