पितृपक्ष की सप्तमी पर पूर्वजों के श्राद्ध और तर्पण का सिलसिला जारी है। पितरों को प्रसन्न करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए सप्तमी तिथि पर सुबह से ही पिशाच मोचन और गंगा के तट पर तर्पण करने वालों की भीड़ लगी रही। बुधवार को सप्तमी की तिथि को देह त्याग करने वालों का नेमियों ने श्रद्धा के साथ तर्पण किया।
विधिपूर्वक पूजन संपन्न करने के बाद पूर्वजों से उन्नति का आशीर्वाद लिया। घरों में भी सप्तमी की तिथि को पूजन संपन्न हुआ। पितरों का स्मरण कर पूर्वजों से गलती के लिए क्षमा मांगी और परिवार पर आशीर्वाद बनाए रखने की प्रार्थना की। पितरों के लिए तैयार किए गए भोजन से चार ग्रास निकाल कर एक ग्रास गाय, दूसरा कुत्ता, तीसरा कौवे और चौथा ग्रास अतिथि या मान पक्ष के सामने रखा गया। पूजा संपन्न करने के बाद ब्राह्मण को दान दिया गया।