फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भटकती आत्माओं की मुक्ति का द्वार है पिशाचमोचन

विज्ञापन
विज्ञापन
वाराणसी। भारत में सिर्फ पिशाच मोचन कुंड पर ही त्रिपिंडी श्राद्ध होता है, जो पितरों को प्रेत बाधा और अकाल मृत्यु की बाधाओं से मुक्ति दिलाता है। इस कुंड का बखान गरुड़ पुराण में भी किया गया है। पितृपक्ष में पिशाच मोचन कुंड का महत्व और भी बढ़ जाता है। शनिवार से शुरू हो रहे पितृपक्ष पर तर्पण के लिए आने वालों का सिलसिला शुरू हो चुका है। गरुण पुराण और काशी खंड में इस कुंड का वर्णन मिलता है।
विज्ञापन

तीर्थ पुरोहितों के अनुसार काशी खंड में वर्णित है कि पिशाच मोचन मोक्ष तीर्थ स्थल की उत्पत्ति गंगा के धरती पर आने से भी पहले से है। मान्यता के अनुसार यहां स्थित पीपल के वृक्ष पर भटकती आत्माओं को बैठाया जाता है। इस दौरान पेड़ पर सिक्का रखवाया जाता है ताकि पितरों का सभी उधार चुकता हो जाए और पितर सभी बाधाओं से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त कर सकें और यजमान भी पितृ ऋण से मुक्ति पा सकें। शनिवार से पितृपक्ष शुरू हो रहा है।
मान्यता के अनुसार तो काशी में मरने वालों को वैसे भी मोक्ष मिल जाता है, लेकिन इस कुंड पर अकाल मौत या अन्य किसी वजह से भटकती आत्माओं को मोक्ष मिलता है। यही वजह है कि यहां देश भर से लोग आते हैं और तर्पण करते हैं। पितृपक्ष की प्रतिपदा यानी शनिवार को बड़े पैमाने पर तर्पण किया जाएगा। इसके लिए पिशाच मोचन और गंगा के घाटों पर भोर से ही पिंडदान करने वालों की भीड़ जुट जाएगी। वहीं जो लोग गया श्राद्ध करने जाते हैं वह भी काशी में पिंडदान करते हैं। पिंडदान करने का सिलसिला तो बुधवार से ही शुरू हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें