माना जा रहा है कि इसी साल बनारस को रोपवे की सौगात मिल जाएगी। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर पूरी होने वाली इस परियोजना में वैबिलिटी गैप फंडिंग का भी आंकलन किया जाएगा। इसमें बताया गया कि परियोजना में लागत लगने के बाद उसकी आय और मेंटेनेंस पर भी कार्ययोजना बनाई जाएगी।
मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने कहा कि वर्चुअल बैठक में रोपवे परियोजना को सहमति दी गई है। इस पर शासन के निर्देश पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। 31 अगस्त तक परियोजना का पूरा खाका तैयार कर लिया जाएगा।
रोपवे संचालन के लिए सर्वे करने वाली वैपकॉस ने तीन रूटों पर इसका प्लान तैयार किया है। अगर यह ट्रायल सफल हुआ तो वाराणसी की संकरी गलियों में रोपवे मेट्रो का विकल्प बन जाएगा। इसमें पहला रूट शिवपुर से कचहरी, सिगरा, रथयात्रा होते हुए लंका, दूसरा कचहरी से लहुराबीर, मैदागिन, गोदौलिया होते हुए लंका और तीसरा रूट लहरतारा से नरिया होते हुए बीएचयू तक है। पुराने शहर के लिए अब तक हुए सर्वे में रोपवे को मुफीद माना गया है।
रोपवे परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर यातायात के सभी विकल्पों से जुड़ जाएगा। गंगा के रास्ते नाव और क्रूज से मंदिर को जोड़ने के बाद रोपवे के जरिए नभ मार्ग से भी मंदिर की कनेक्टिविटी हो जाएगी। वर्तमान में गोदौलिया के आगे काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा घाट जाने वाले मार्ग पर वाहनों के प्रतिबंध है।