कला और संस्कृति की नगरी में जर्जर मकान लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बनने लगे हैं। पुराने शहर की गलियों मेें कई ऐसे भी जर्जर मकान हैं जो हल्का सा भी झटका सहने की स्थिति में नहीं है। कई मकान तो दूसरे भवनों के सहारे खड़े हैं, पास के मकानों का सपोर्ट हटने पर जर्जर मकान भरभरा कर जमीन पर गिर पड़ेंगे। फिर भी ऐसे मकानों में लोग रह रहे हैं। इंजीनियरों द्वारा इन भवनों को जर्जर घोषित करने पर भी नगर निगम व जिला प्रशासन ने इन्हें गिराने की कोई कार्रवाई नहीं की। बृहस्पतिवार को रानी भवानी इलाके में मकान गिरने के बाद एक बार फिर नगर निगम सक्रिय हुआ है।
गलियों में स्थित जर्जर मकानों में लोग रहते हैं, जबकि नगर निगम 100 से 150 वर्ष पुराने भवनों को जर्जर घोषित करने के साथ नोटिस भेज चुका है। मगर, लोग खाली नहीं कर रहे हैं। उधर, नगर निगम भी इन्हें गिराने में रुचि नहीं ले रहा है। दिखा रहा। इन भवनों के पास से गुजरने से लोग कतराते हैं। नगर निगम की सूची के अनुसार दो साल पहले जर्जर भवनों की संख्या 341 हो गई थी लेकिन बीते वर्ष बारिश में कई भवनों की दीवारें गिर गईं और कुछ लोग जख्मी हो गए तो 49 भवनों को ध्वस्त किया गया। अब भी जर्जर भवनों की संख्या 292 है। इसमें 193 ऐसे भवन हैं जिनका ध्वस्तीकरण बेहद जरूरी है। गंगा से दो सौ मीटर के दायरे में प्रतिबंध के कारण अधिकांश भवनों के नींव, ईंटें सड़ गईं हैं। दीवारें, छत व छज्जे काफी जर्जर हो चुके हैं। अगर बंदर भी इनके छज्जों पर कूद जाता है तो मलबा जरूर गिरता है।
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एसीएम की निगरानी में गिराए जाएंगे जर्जर भवन
जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने एसीएम द्वितीय को जिम्मेदारी दी है जो नगर निगम की सूची के अनुसार जर्जर भवनों को गिरवाने का कार्य करेंगे। इसमें नगर निगम व पुलिस उनके सहयोग में कार्य करेगी। ज्यादातर पुराने व जर्जर मकान में किरायेदारी का विवाद है। इस कारण भी कई भवनों का ध्वस्तीकरण नहीं हो रहा है।
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सबसे ज्यादा दशाश्वमेध में हैं जर्जर मकान
शहर के दशाश्वमेध जोन में सबसे ज्यादा 104 जर्जर भवन हैं। कोतवाली जोन में 81, आदमपुर में 24, भेलूपुर में 10, चौक में 58 और वरुणा पार में 15 भवन जर्जर चिन्हित हैं। म्यूनिसिपल एक्ट के तहत नगर निगम को जर्जर मकान गिराने का पूरा अधिकार है। जनहित में जब चाहे जर्जर मकान को गिरा सकते हैं। यदि कोर्ट आदि का कोई आदेश है तो सिटी मजिस्ट्रेट से अनुमति लेकर भी गिरा सकते हैं।
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स्मार्ट सिटी की कार्यशैली पर सवाल, पब्लिक की आपत्ति
दशाश्वमेध वार्ड स्थित त्रिपुरा भैरवी मोहल्ले के रानी भवानी गली में गिरे तीन मंजिल भवन का मौका मुआयना के लिए शनिवार की सुबह क्षेत्र के विधायक व राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार डा.नीलकंठ तिवारी क्षेत्रीय पार्षद नरसिंह दास के साथ मौके पर पहुंचे। उधर, बाद में मौका मुआयना के लिए नगर आयुक्त भी मौके पर पहुंचे जहां पब्लिक ने स्मार्ट सिटी के काम पर आपत्ति जताई और गलियों में होने वाले काम के लिए मिनी जेसीबी के प्रयोग पर आक्रोश जताया।
मंत्री नीलकंठ तिवारी ने मौके से कमिश्नर दीपक अग्रवाल से बात की और तत्काल मलबा हटाने का निर्देश दिया। मंत्री ने कहा कि चार घरों के लोग मलबा जमा होने से अपने घरों में कैद हैं। पानी, बिजली भी बंद है लिहाजा तेजी से मलबा हटाकर वहां सुविधाएं बहाल करते हुए सामान्य जन-जीवन किया जाए। मंत्री ने भवन स्वामी को दूसरे गेस्ट हाउस में शिफ्ट कराते हुए वहां सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
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