इसका नतीजा है कि आम लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं है। यह अलग बात है कि इस ई एफआईआर का क्षेत्र काफी सीमित है। इसमें केवल सामान्य चोरी अथवा गुमशुदगी, छिनैती ,लूट जैसे विषय रखे गए हैं। प्रक्रिया के तहत यूपीकाप के ऐप पर जाकर अपनी प्रथम सूचना अंकित करनी होती है। यह सूचना ततकाल लखनऊ स्थित ई-एफआईआर थाने पर पहुंच जाती है। वहां से संबंधित थानों पर यह प्रथम सूचना चली जाती है। उसके अनुसार पुलिस कार्रवाई करती है।
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इसके तहत बाइक चोरी, साइकिल चोरी, चेन स्नेचिंग ,साइबर अपराध से जुड़ी सूचनाएं, मोबाइल चोरी अथवा बालकों की गुमशुदगी की प्रथम सूचनाएं दर्ज करने का प्रावधान किया गया है। हाल ही में इस ऐप का विस्तार करके जिलाधिकारी के ई डिस्ट्रिक्ट पोर्टल से जोड़ दिया गया है।
अब इन सूचनाओं के साथ पुलिस अधीक्षक से चरित्र प्रमाण पक्ष हेतु अनुरोध, घरेलू सहायता सत्यापन हेतु अनुरोध, कर्मचारी सत्यापन हेतु अनुरोध, किरायेदार सत्यापन हेतु अनुरोध भी शामिल कर दिया गया है। लेकिन इस ऐप का प्रचार प्रसार पुलिस विभाग द्वारा नहीं किया गया जिसका नतीजा यह है कि जिले में अब तक महज 16 लोगों ने इस ऐप का उपयोग करके ई एफआईआर कराया है। इसमें मधुबन थाना क्षेत्र के चार लोगों ने इसका उपयोग किया है। बाकी थाना क्षेत्र के इक्का दुक्का लोगों ने ही इसका उपयोग किया है।
केस स्टडी :
केस- 1. कोपागंज थाना क्षेत्र के चेरुइया गांव निवासी संजय यादव कहते हैं कि उनके घर पर आकर बदमाशों ने फायरिंग की थी। इस घटना की सूचना मैंने कोपागंज थाने की पुलिस को दिया था। लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। ऑन लाइन एफआईआर के बारे में मुझे जानकारी ही नहीं थी। अन्यथा इसका उपयोग करता।
केस 2. मधुबन थाना क्षेत्र के अकरम का कहना है कि उसकी बाइक उसके दरवाजे से चोरी हो गई थी। मुकदमा दर्ज कराने के लिए उसे कई दिनों तक दौड़ना पड़ा। एक शुभ चिंतक की सलाह पर डीआईजी आजमगढ़ के पास पहुंच कर उसने गुहार लगाई। डीआईजी ने उसे इस ऐप के बारे में बताया और स्वयं भी एसपी को फोनकर पीड़त की मदद करने को कहा।
मऊ के एएसपी एसके श्रीवास्तव ने कहा कि ई- एफआईआर केवल गुमशुदगी मोबाइल , चेन गायब होने अथवा छिनैती जैसे हलके अपराधों वाले मामलों में की जाती है। इसके लिए यूपी कोप ऐप लांच किया गया है। लोगों को आनलाइन सूचनाएं अंकित इस ऐप का उपयोग करना चाहिए। इसमें गंभीर अपराधों वाले मामलों की एफआईआर दर्ज नहीं होती।