पंचबदन प्रतिमा को सिंहासन पर विराजमान कराकर साक्षी विनायक, ढुंढिराज गणेश, अन्नपूर्णा मंदिर होते हुए विश्वनाथ मंदिर तक लाया जाएगा। इस दौरान बाबा का विग्रह श्वेत वस्त्र से ढंका रहेगा। मंदिर पहुंचने के बाद बाबा की पंचबदन प्रतिमा को मां पार्वती और गणेश के साथ पारंपरिक झूले पर विराजमान कराया जाएगा।
दीक्षित मंत्र से पूजन के बाद सर्वप्रथम गोलोकवासी पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी के पुत्र वाचस्पति तिवारी बाबा को झूला झूलाएंगे। इसके बाद सप्तर्षि आरती कराने वाले महंत परिवार के सदस्य बाबा का झूला झूलाएंगे। बाबा के झूले की डोर थामने की आज्ञा सिर्फ उन्हीं भक्तों को होगी जो बिना सिला वस्त्र धारण किए रहेंगे।