वाराणसी। बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। तेज हवाओं के कारण कुछ इलाकों में धान की फसलें गिर गई हैं। जिन किसानों ने धान की कटाई कर ली है, लेकिन मड़ाई नहीं की है, उनकी फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। वहीं, कटाई और रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बोआई में लगभग 10 दिन की देरी होगी। सब्जियों में रोग लगने की संभावना भी बढ़ गई है।
जिला कृषि अधिकारी संगम सिंह मौर्य ने बताया कि यदि मौसम इसी तरह बना रहा तो नुकसान बढ़ सकता है। जिन्होंने कटाई के बाद मड़ाई नहीं की है, उनके धान की गुणवत्ता प्रभावित होगी। हालांकि, जिन किसानों ने सब्जियों की बोआई कर दी है, उनके लिए यह मौसम फायदेमंद साबित हो सकता है। चौबेपुर क्षेत्र के अजांव, गरथौली, परानापुर, पलकहां, छितमपुर, गोलधमकवां, कादीपुर कला, हडियाडीह, उगापुर, चंद्रावती और धौरहरा गांवों में धान की फसलें जमीन पर गिर गई हैं। गरथौली के किसान संतोष सिंह ने बताया कि जो धान गिर गए हैं, उन्हें काफी नुकसान हुआ है, जबकि खड़ी फसल को अधिक नुकसान नहीं हुआ है। आलू, मटर, साग, पालक और हरी धनिया की बोआई भी हुई है, जिन्हें आंशिक नुकसान पहुंचा है।
78 गांवों में पांच हजार हेक्टेयर में खेती
चिरईगांव। ब्लॉक के 78 गांवों में खरीफ सीजन में लगभग पांच हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान, ज्वार, बाजरा, मक्का, हरा चारा, शाक-सब्जी और फूलों की खेती की गई है। सहायक कृषि अधिकारी डॉ. विनीत ने बताया कि लगभग साढ़े तीन हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती हुई है, जबकि शेष क्षेत्र में अन्य फसलें बोई गई हैं। कुल 892 किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पंजीकरण कराया है। जिन किसानों को नुकसान हुआ है, वे शिकायत दर्ज कर क्षतिपूर्ति प्राप्त कर सकते हैं।