अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष व महानिर्वाणी अखाड़े के महासचिव महंत रवींद्रपुरी ने कहा कि अभियान में काशी के उपेक्षित देवालय व्यवस्थित किए जाएंगे। ऐसे देवालयों में नियमित पूजन-अर्चन शृंगार आरती का प्रबंध किया जाएगा। जहां पुजारी नहीं है वहां पुजारियों की नियुक्ति की जाएगी।
श्रीकाशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी और गंगा महासभा के संगठन महामंत्री गोविंद शर्मा के नेतृत्व में एक समिति इस तरह के मंदिरों का चयन करेगी।आर्थिक प्रबंधन महानिर्वाणी अखाड़ा करेगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से इस पुनीत कार्य में बढ़ चढ़कर सहभागिता करने का आह्वान किया।
स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि यह अभियान धर्मरक्षा एवं जनजागरण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। आगे चलकर स्थानीय लोगों की दस सदस्यीय समितियां बनाई जाएंगी जो मंदिरों में पूजा आरती के प्रबंध की चिंता करेंगी।
पिछले वर्ष काशी में आयोजित संस्कृति संसद में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवीन्द्रपुरी ने यह संकल्प व्यक्त किया था। अब दूरदर्शी सोच के साथ योजनापूर्वक एवं चरणबद्ध से इसे मूर्त रूप देने की दिशा में कार्य प्रारंभ हो रहा है।