तीन साल पहले नावों में सीएनजी इंजन लगवाने वाला नगर निगम प्रशासन अब जागा है। नाविकों को नोटिस देकर डीजल इंजन जमा कराने का दबाव डाला जा रहा है। लाइसेंस रद्द करने की धमकी दी गई है। इससे नाविक परेशान हैं। इसी सिलसिले में नाविकों ने मंगलवार को मान मंदिर घाट पर बैठक की और आरपार की लड़ाई छेड़ने का एलान किया है।
मांझी समाज के अध्यक्ष प्रमोद मांझी ने कहा कि नगर निगम प्रशासन नोटिस देकर समाज के लोगों को डराने का प्रयास कर रहा है। नाविक समाज डरने वाला नहीं है। संघर्ष करके आगे बढ़ा जाएगा। नावों में तीन साल पहले सीएनजी इंजन लगाए गए थे। तब यह नहीं बताया गया था कि नाविक ही डीजल इंजन जमा कराएंगे। इंजन जमा कराने की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था और नगर निगम को मिली थी। अब नाविकों को नोटिस देकर डीजल इंजन मांगा जा रहा है। अब इंजन कहां से मिलेंगे। नाविकों को डराने का यह अंदाज स्वीकार नहीं किया जाएगा।
विवाद से होगा नुकसान
उन्हाेंने कहा कि देव दीपावली की तैयारी चल रही है। छोड़ी, बड़ी नाव व बजड़े बुक हो चुके हैं। ऐसे में डीजल और सीएनजी इंजन का विवाद ठीक नहीं है। इससे नाविकों को नुकसान उठाना पड़ेगा।
अब भी डीजल इंजन से नावें चल रही हैं। इन्हें सीएनजी इंजन में बदलना है। इसकी प्रक्रिया चल रही है। नोटिस देकर जल्द इंजन बदलने और डीजल इंजन को जमा कराने की हिदायत दी गई है। गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाना हैश। जो इंजन नहीं बदलेगा, उनके लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे। - अनुपम त्रिपाठी, लाइसेंस अधिकारी, नगर निगम
नाविकों की कुल संख्या
पंजीकृत- 1200
सीएनजी में बदलना था- 900
इंजन की खराबी
नाविकों का कहना है कि सीएनजी पर खर्च कम आता है, लेकिन इंजन की खराबी नहीं दूर हो पाती है। महीनों नाव खड़ी रखनी पड़ती है, इसलिए डीजल इंजन का रुख किया जा रहा है। इंजन की खराबी से परेशान कई नाविकों ने सीएनजी की जगह मोटर इंजन लगा लिया है। सीएनजी इंजन के चालू होने में दिक्कत रहती है। इसके पुर्जे आसानी से नहीं मिल पाते हैं।
नाविकों के मुताबिक, गंगा के उत्तरी छोर पर सीएनजी स्टेशन बनाया गया है। एक बार ईंधन भरवाने के लिए करीब आठ किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है। आने-जाने में करीब तीन से चाल किलोग्राम ईंधन खर्च हो जाता है। एक 10 लीटर की टंकी है। छह से सात किलोग्राम सीएनजी भरी जाती है।
गंगा और जनता की सेवा नाविक समाज का धर्म है। समाज पूरी तरह गंगा पर निर्भर है। अब नगर निगम तमाम उपक्रमों के जरिये नाविक समाज का उत्पीड़न कर रहा है। - राकेश कुमार साहनी।
गंगा में डूबते लोगों की जान बचाई जाती है। इसका क्रेडिट देने के बजाय नाविकों का उत्पीड़न किया जा रहा है। इसके विरोध में समाज की बैठक बुलाई गई है। समस्या के समाधान पर मंथन होगा। -बबलू साहनी।