संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षकों को अपने आचरण एवं व्यवहार से छात्रों में क्रियाशीलता और सृजनात्मकता को बढ़ाने की आवश्यकता है। मानव संसाधान विकास केंद्र के सभी कार्यक्रम हमारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वह शुक्रवार को बीएचयू में यूजीसी ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट सेंटर की ओर से संस्कृत विषय में अष्टम पुनश्चर्या पाठ्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित कर रहे थे।
अध्यक्षता करते हुए प्रो. विजय कुमार शुक्ल ने कहा कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय में इसी शैक्षणिक सत्र से हिंदू स्टडीज में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रारंभ होने जा रहा है, जिससे संस्कृत के अध्येताओं एवं अध्यापकों के लिए नए अवसर की प्राप्ति होगी तथा शास्त्रों का प्रसार होगा। द्विसाप्ताहिक पाठ्यक्रम में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से 57 प्रतिभागी ऑनलाइन प्रतिभाग कर रहे हैं। स्वागत प्रो. प्रवेश कुमार श्रीवास्तव, संचालन डॉ. ठाकुर शिवलोचन शांडिल्य और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. मिताली देव ने किया। इस दौरान महामहोपाध्याय प्रो. जयशंकर लाल त्रिपाठी ने संस्कृत वांग्मय में व्याकरणशास्त्र की उपादेयता पर व्याख्यान दिया।