गंगा और वरुणा की बाढ़ रविवार को और विकराल हो गईं। इनके उफान ने शहरी इलाकों में हालात और बिगड़ गए। रात 2 बजे गंगा का जलस्तर 72.18 मीटर तक पहुंच गया। इस के चलते तारापुर, टिकरी से रमना, मदरवा, मलहिया, सामने घाट, नगवा, अस्सी के अलावा वरुणा किनारे की कॉलोनियों में एक लाख से अधिक लोग बाढ़ से घिर गए।
लगातार जलस्तर के बढ़ने से आशंका जताई जा रही है कि नगवां-अस्सी मार्ग तक सोमवार को पानी पहुंच सकता है। बलिया में गंगा और घाघरा तबाही मचा रही हैं। रविवार को बाढ़ ने 2003 का रिकॉर्ड तोड़ दिया। एनएच 31 पर गंगा के पानी का दबाव बढ़ गया है। बलिया-छपरा रेल रूट पर 11 घंटे तक यातायात बाधित रहा। चौबेछपरा, श्रीनगर में कटान से एक दर्जन मकान नदी में विलीन हो गए।
गाजीपुर शहर में पानी घुस गया है। काशी में गंगा के जलस्तर में दोपहर बाद तेज इजाफा होने से अस्सी मार्ग पर गंगा के बढ़ने से कई गलियां बंद हो गईं, जबकि प्राचीन दशाश्वमेध से निकली सड़क से होकर पक्का महाल के बंगाली टोला गली और भूतेश्वर गली में बाढ़ का पानी पहुंचने से अफरा-तफरी मच गई।
विश्वसुंदरी पुल से सामने घाट-लंका मार्ग पर पानी पहुंचने से यातायात ठप हो गया है। मध्यप्रदेश में हुई भीषण बारिश का पानी सहायक नदियों के जरिए गंगा में आने से जलस्तर में बढ़ाव तेज हुआ है। देर शाम दो सेंटीमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बढ़ाव होने लगा। गंगा अस्सी मार्ग पर देवरहा बाबा आश्रम के आगे पहुंच गई। इससे जिस जगन्नाथपुरी गली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झाड़ू लगाकर स्वच्छ काशी के मिशन को आगे बढ़ाया था, उसमें पानी भर गया।
एक के बाद एक घरों, गलियों में बाढ़ का पानी भरने से तटीय इलाकों में खलबली मची है। लोग छतों के अलावा परिचितों, रिश्तेदारों या फिर राहत शिविरों में शरण ले रहे हैं।रविवार को दिन में एनडीआरएफ के अलावा अन्य लोगों की मदद से घरों में फंसे तीन सौ से अधिक बच्चों, महिलाओं को सीढ़ियों, रस्सियों के सहारे निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर भिजवाया गया। अब अस्सी घाट के अलावा नगवा, गंगोत्री बिहार, रामानुज नगर के होटलों, घरों में जाने के लिए नावों की मदद लेनी पड़ रही है। विश्वसुंदरी पुल के पास रमना लिंक से सामने घाट मार्ग पानी भरने से ठप हो गया है। यह टेंगरा मोड़ से लंका के बीच आवाजाही का प्रमुख मार्ग है।
पानी भरने के बाद सोनभद्र, दुद्धी, ओबरा, राबर्ट्सगंज, चंदौली के अलावा चार पड़ोसी राज्यों के व्यापारियों की इस मार्ग से आवाजाही प्रभावित हो गई है। अब उन्हें वाराणसी आने-जाने के लिए टोल बैरियर से होकर चितईपुर या फिर मोहनसराय के रास्ते लंबी दूरी तय करनी होगी। चंदौली में रविार को पांच गांव संपर्क मार्ग से कट गए। कुल 105 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं।
सोनभद्र में रिहंद डैम में दोपहर बाद जलस्तर घटकर 871.2 फुट हो गया। हालांकि अभी भी अधिकतम जलस्तर 870 फुट से यह अधिक है। इस कारण नौ फाटक खुले रखकर पानी बहाया जा रहा है। ओबरा डैम के भी छह गेट खुले रखकर पानी छोड़ा जा रहा है। इससे अभी भी सोन नदी में उफान की स्थिति है। कई दिनों तक हुई बारिश से शाहगंज कूड़ा रजवाहा कई जगह टूट गया हैै।
इससे पानी खेतों में बहने से धान की नर्सरी बर्बाद हो रही है। भदोही में बिहरोजपुर और बेरासपुर गांव में सैकड़ों बीघे फसल जलमग्न हो गई। मिर्जापुर में 1978 के दौरान आई बाढ़ के रिकार्ड को तोड़ने के करीब गंगा पहुंच रही है। दो सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रही गंगा का जलस्तर रविवार की शाम सात बजे 77.960 मीटर था जो खतरे के निशान से 236 सेंटीमीटर अधिक है। पानी बढ़ने की यही रफ्तार रही तो एक दो दिनों के अंदर 78 में आए बाढ़ का रिकार्ड 80.34 मीटर टूट जाएगा।