वाराणसी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के बीच दवाओं की कीमतों का भारी अंतर मरीजों की जेब पर भारी पड़ रहा है। एक ही सॉल्ट और फॉर्मूले की दवाएं बाजार में अलग-अलग अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर बेची जा रही हैं। निजी मेडिकल स्टोर्स पर बिकने वाली ब्रांडेड दवाओं की कीमतें सरकारी जन औषधि केंद्रों की तुलना में 6 से 10 गुना तक अधिक हैं।
पेट दर्द, गैस (एसिडिटी), एंटीबायोटिक, मल्टीविटामिन, दर्द निवारक और कफ सिरप जैसी रोजमर्रा की दवाओं में सबसे ज्यादा मुनाफाखोरी देखी जा रही है। उदाहरण के तौर पर, गैस और एसिडिटी के इलाज में काम आने वाली ओमेप्राजोल व डोमपेरिडोन का 10 कैप्सूल का पत्ता प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र पर मात्र 17-20 रुपये में उपलब्ध है, जबकि निजी दुकानों पर नामी ब्रांड्स के तहत यही फॉर्मूला 100 से 180 रुपये तक में बिक रहा है।