देश भर में बनी थीं पांच वेधशालाएं
ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष प्रो. अमित कुमार शुक्ल ने बताया कि महाराजा सवाई जयसिंह ने देश भर में पांच स्थानों पर वेधशालाओं का निर्माण कराया था। इसमें जयपुर, दिल्ली, मथुरा, उज्जैन और काशी शामिल हैं। जयपुर में 19 यंत्रों की सर्व सुविधा संपन्न वेधशाला आज भी है। इसके बाद दिल्ली में 13 यंत्रों की, मथुरा में पांच यंत्रों की वेधशाला थी, जो अब पूरी तरह से नष्टï हो चुकी है। इसके बाद छह यंत्रों की वेधशाला मानमंदिर घाट पर वाराणसी में बनाई गई थी।
जयपुर के ज्योतिर्विद ने किया था सहयोग
प्राच्य विद्या के प्राचीनतम केंद्र संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में वेधशाला न होने के कारण ज्योतिष के छात्र प्रायोगिक ज्ञान से वंचित रह जाते थे। इसे देखते हुए तत्कालीन कुलपति प्रो. विद्या निवास मिश्र ने वर्ष 1992 में परिसर में महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी वेधशाला का निर्माण करवाया था। इसके निर्माण में जयपुर के प्रख्यात ज्योतिर्विद् पं. कल्याण दत्त शर्मा का विशेष सहयोग रहा। इस वेधशाला का शुभारंभ 23 अगस्त 1992 को सूबे के तत्कालीन राज्यपाल वी. सत्यनारायण रेड्डी ने किया था। दो-तीन वर्ष तक वेधशाला का उपयोग किया गया। इसके बाद परिसर में ताला लगा दिया गया। विशिष्टजनों के आगमन के दौरान ही वेधशाला का ताला खुलता है।