महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र और होमी भाभा कैंसर अस्पताल (एचबीसीएच) में कैंसर मरीजों की सर्जरी अब बिना चीर फाड़ के होगी। ध्वनि यंत्र की माइक्रो लेजर तकनीक से अब तक 20 मरीजों की सर्जरी हो भी चुकी है। सिर और गले के कैंसर विभाग के प्रभारी डॉ. असीम मिश्रा ने बताया कि इस सर्जरी का इस्तेमाल ध्वनि यंत्र के कैंसर, ल्यूकोप्लाकिया, पोलिप कैंसर और मुंह के शुरुआती कैंसर के इलाज में किया जाता है। इसमें समय कम लगता है। साथ ही कहीं भी सर्जरी (कट) के निशान भी नहीं आते। अस्पताल में अब तक इस विधि से की गई ज्यादातर सर्जरी ध्वनि यंत्र से संबंधित रही। माइक्रोलेरेंजियल लेजर सर्जरी के जरिए ध्वनि यंत्र के कैंसर का इलाज करने वाला एमपीएमएमसीसी राज्य का पहला अस्पताल है। इससे पहले यह सर्जरी पूरे उत्तर प्रदेश में कहीं भी उपलब्ध नहीं थी। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि मरीज को ओपन सर्जरी से नहीं गुजरना पड़ता और कुछ घंटे बाद ही मरीज को अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है।
तंबाकू सबसे बड़ा कारक
एमपीएमएमसीसी के उपनिदेशक डॉ. दुर्गातोष पांडेय ने बताया कि ध्वनि यंत्र का कैंसर सिर और गले के कैंसर के तहत आता है। 90 प्रतिशत तक सिर और गले के कैंसर के लिए तंबाकू जिम्मेदार है। बीमारी से बचने के लिए तंबाकू उत्पादों के सेवन से बचना चाहिए।