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वाराणसी: पांच साल में प्रेमचंद संस्थान में एक भी शोध नहीं, बीएचयू के पास है संचालन की जिम्मेदारी

Sat, 31 Jul 2021 12:31 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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लगा रहता है ताला। - फोटो : अमर उजाला
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प्रेमचंद की कहानियों में किसानों का दर्द झलकता था। मगर आज मुंशी प्रेमचंद, उनकी कहानियों, उपन्यासों के साथ भी वही छलावा हो रहा है। नाम के लिए मुंशी प्रेमचंद शोध संस्थान बना दिया। पांच साल बीत गए लेकिन  एक भी शोध आज तक नहीं हुआ।

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मुंशी प्रेमचंद शोध संस्थान की स्थापना का उद्देश्य था कि यहां शोधार्थी आएं और उपन्यास सम्राट को जानें। उनकी कहानियों और साहित्य पर शोध करें। उम्मीद थी कि यह शोध संस्थान उनके बारे में कुछ नए तथ्य सामने लाएगा लेकिन पांच साल का परिणाम निराशाजनक है। सुबह संस्थान का ताला खुलता है, शाम को बंद कर दिया जाता है। इसके संचालन की जिम्मेदारी बीएचयू की है। उपन्यास जगत में ध्रुव तारे की मानिंद चमकने वाले मुंशी प्रेमचंद के शोध संस्थान को शोधार्थियों से गुलजार होना चाहिए था, लेकिन स्थिति इसके उलट है।

मुंशी प्रेमचंद शोध संस्थान का शिलान्यास 31 जुलाई 2005 को तत्कालीन केंद्रीय संस्कृति मंत्री जयपाल रेड्डी और सीएम मुलायम सिंह यादव ने किया था। 11 साल के बाद शोध संस्थान दो करोड़ 80 लाख से तैयार हुआ और 31 जुलाई 2016 को केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डॉ. महेंद्र पांडेय व कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने लोकार्पण किया था। लेकिन आज तक एक भी स्थायी पद शोध संस्थान के लिए स्वीकृत नहीं हो सका है।

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नियुक्ति के लिए हो रहा पत्राचार
प्रेमचंद शोध संस्थान की समन्वयक आभा गुप्ता ठाकुर ने बताया कि संस्थान में अभी तक नियुक्ति और शोध छात्रों के अलाटमेंट नहीं होने के कारण शोध कार्य शुरू नहीं हो सके हैं। रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए पत्राचार किया जा रहा है। 

कमरे में बंद है लोकार्पण का पट्ट
मुंशी प्रेमचंद शोध संस्थान के लोकार्पण का पट्ट शुभारंभ के बाद से ही संस्थान के प्रथम तल पर स्थित एक कमरे में बंद है। प्रथम तल के कमरों का ताला भी लंबे समय पर खुलता है।
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आज होगा पुस्तक का लोकार्पण, वेबसाइट होगी लांच
समन्वयक आभा गुप्ता ठाकुर ने बताया कि 2018 में उनको शोध संस्थान की जिम्मेदारी दी गई है। देश भर के शोध छात्रों के निबंध पर आधारित पुस्तक प्रेमचंद और हमारा समय तैयार है। इसका लोकार्पण उनकी जयंती पर शनिवार को होगा।  शोध संस्थान की वेबसाइट और वृत्तचित्र भी शुरू हो जाएगा। ऑनलाइन प्रतियोगिताएं, व्याख्यान कराए जाते हैं। दूरी होने के कारण अधिकांश आयोजन बीएचयू में ही कराए जाते हैं। रेडियो प्रेमचंद एप के जरिए सुनो मैं प्रेमचंद का प्रसारण डेढ़ सौ दिनों से किया जा रहा है। 

संस्थान एक नजर में 
केंद्र के प्रथम तल पर सभागार एवं द्वितीय तल पर निदेशक कक्ष तथा स्कालर्स चैंबर व कार्यालय हैं। 
0.49 हेक्टेयर में उद्यान निर्मित है। 
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