विपक्षी नेताओं का कहना था कि काशी में जीत के जरिये पीएम मोदी को घेरा जा सकेगा। आगामी लोकसभा चुनाव से पहले उनके विकास मॉडल पर सवाल उठाए जा सकेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। विपक्ष की सारी योजना फेल हो गई। जनता ने काशी के विकास मॉडल को पसंद किया और भाजपा प्रत्याशी को रिकॉर्ड मतों के अंतर से चुनाव जीता दिया।
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वाराणसी भाजपा में जश्न
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पीएम के संसदीय क्षेत्र में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का खूब आना होता है। पिछले छह वर्षों के दौरान मुख्यमंत्री 100 से ज्यादा बार वाराणसी आ चुके हैं। वह भी वाराणसी के विकास मॉडल को अपनाने की वकालत करते थे। विपक्ष की मंशा थी कि एक तीर से दो निशाने किए जाएं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मुख्यमंत्री ने चुनावी सभाएं भी की थीं और शहर की जनता से आशीर्वाद मांगा था। कहा था कि केंद्र व राज्य में भाजपा की सरकार है। अब जरूरत ट्रिपल इंजन की सरकार बनाने पर है। यह अपील जनता को पसंद आया और मेयर की सीट भाजपा की झोली में डाल दी।
वाराणसी नगर निगम में 16 लाख से ज्यादा मतदाता हैं। इनमें से साढ़े छह लाख से ज्यादा मतदाताओं ने वोट डाले हैं। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मतदाताओं की भी संख्या अच्छी है, फिर भी बसपा प्रत्याशी सुभाष चंद्र माझी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। ऐसा लगा कि पार्टी प्रत्याशी को काडर वोट नहीं मिल पाए हैं। मुस्लिमों ने भी बसपा प्रत्याशी को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। ज्यादातर राजनीतिक दलों ने सवर्ण प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे थे, इसलिए बसपा ने ओबीसी का दांव चला था। हालांकि, यह दांव नहीं चल सका। पार्टी प्रत्याशी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। पार्षद पद का एक भी प्रत्याशी चुनाव नहीं जीता है।
आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी शारदा टंडन को करारी शिकस्त मिली है। पार्टी ने प्रत्याशी बनाया और मुद्दों को गिनाकर जनता से समर्थन मांगा, लेकिन जनता ने नकार दिया। पार्टी प्रत्याशी की जमानत तक जब्त हो गई। अंतिम राउंड की मतगणना तक शारदा टंडन को 8077 मत ही मिल पाए थे। एक भी पार्षद पद का प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सका है।
वाराणसी में मेयर सीट पर भाजपा के अशोक तिवारी की जीत
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