न्यायाधीकरण (एनजीटी) ने अपने आदेश में आगे कहा है कि क्या कोई अध्ययन हुआ की कितनी ड्रेजिंग (निकर्षण) करनी है अथवा ड्रेजिंग के नाम पर बालू खनन किया गया, जिससे ढाई करोड़ की आमदनी दिखाई गई है। एनजीटी ने अपने आदेश में कहा है कि चूंकि सिंचाई विभाग के माध्यम से पूरे कार्य को कराया जा रहा था। ऐसे में अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव सिंचाई विभाग स्पष्टीकरण व विस्तृत रिपोर्ट के साथ व्यक्तिगत रूप से एनजीटी के समक्ष 14 फरवरी को उपस्थित हों।
गंगा पार रेत में नहर को दिया गया था आकार
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नमामि गंगे जल शक्ति मंत्रलाय के निदेशक ने पांच जनवरी को एनजीटी को अपनी रिपोर्ट भेज दी थी। इसमें कहा गया था कि नमामि गंगे से किसी प्रकार कि सहमति नहर निर्माण के लिए नहीं ली गई थी। नमामि गंगे के निदेशक के माध्यम से एनजीटी को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि सचिव, जल शक्ति मंत्रालय की अगुवाई में उच्च स्तरीय बैठक में निष्कर्ष निकला कि नहर निर्माण व बालू उठाव मामले में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नमामि गंगे की आवश्यक सहमति भी नहीं ली गई। सामाजिक कार्यकर्ता अवधेश दीक्षित ने एनजीटी में एक फरवरी 2022 को याचिका दायर की थी।
असि घाट से राजघाट के दूसरे छोर पर वर्ष 2021 में गंगा नदी में 5.5 किलोमीटर लंबी और 45 मीटर चौड़ी व सात मीटर गहरी नहर बनाई गई थी। नहर अगस्त से सितंबर तक गंगा नदी की बाढ़ में सपाट हो गई।