मैथिल समाज की ओर से वाराणसी में नववर्ष मनाया गया। इस दौरान मिथिला पंचांग का लोकार्पण भी हुआ। वहीं भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए लोकनृत्य झिझिया की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही।
मैथिल समाज की ओर से मिथिला नववर्ष का आयोजन जुड़ शीतल के रूप में चौखंभा स्थित भारतेंदु भवन में किया गया। इस अवसर पर भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए लोकनृत्य झिझिया की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही। मिथिला पंचांग के लोकार्पण के साथ ही समाज के विशिष्टजनों को सम्मानित भी किया गया।
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मिथिला नववर्ष महोत्सव की शुरुआत दीप जलाकर और महाकवि विद्यापति के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। समारोह के मुख्य अतिथि बार कौंसिल सदस्य विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि आम मैथिल जनमानस को समर्पित पाकेट मिथिला पंचांग में मिथिला के पर्व, त्योहार, लगन, विवाह, द्विरागमन, जनेऊ, मुंडन, गृहप्रवेश तिथियों को आसान शब्दों में दर्शाया गया है।
विशिष्ट अतिथि सेंट्रल बार एसोसिएशन के महामंत्री सुरेंद्रनाथ पांडेय ने कहा कि जुड़ शीतल का प्रकृति से सीधा संबंध है। समारोह में बरसात नृत्य झिझिया की प्रस्तुति में वृष्टि के नृत्य निर्देशन में इशिता, वैश्नवी, श्रिया, सुनैना, परी और कावेरी ने दी।आगंतुकों को तुलसी का पौधा वितरित किया गया।