काशी विश्वनाथ धाम का गंगा द्वार।
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शिवरात्रि पर गंगा द्वार से काशी विश्वनाथ मंदिर में जाने वाले दर्शनार्थियों के लिए दो रूट निर्धारित किए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक भैंसासुर घाट से ललिता घाट तक और अस्सी घाट से ललिता घाट तक नावों का संचालन होगा। बुधवार को नावों की जांच करने पहुंचे अधिकारियों ने नाविकों को नावों में भार क्षमता के अनुसार ही पर्यटकों को बैठाने के निर्देश दिए।
शिवरात्रि पर्व गंगा द्वारा से भी श्रद्धालुओं को प्रवेश मिलेगा। सुरक्षित और सुगमता पूर्वक काशी विश्वनाथ का दर्शन करने के लिए नगर आयुक्त प्रणय सिंह के निर्देश पर जोनल अधिकारी पीके द्विवेदी ने बुधवार को नावों की सुरक्षा मानकों की जांच की। उन्होंने नावों की क्षमता के अनुसार क्यूआर कोड स्टीकर लगवाया। उन्होंने बताया कि 25 फरवरी तक नावों का जांच अभियान चलाया जाएगा। प्रभारी अधिकारी के मुताबिक 800 नावों में संपूर्ण विवरण के साथ क्यूआर कोड स्टीकर चस्पा करा दिया गया है। इस दौरान 250 नाविकों का लाइसेंस भी बनाया गया।
महाशिवरात्रि पर्व पर नावों की जांच के लिए नगर निगम ने जांच अधिकारियों की नियुक्ति की है। अपर नगर आयुक्त सुमित कुमार को नोडल बनाया गया है। इसके लिए नगर निगम चार जोनल अधिकारियों को जिम्मेदारी दी है। गुरू प्रसाद पांडेय को आदमपुर जोन, राजेश अग्रवाल को कोतवाली जोन, रामेश्वर दयाल को दशाश्वमेध जोन, प्रमिता पांडेय को भेलूपुर जोन के घाटों की जिम्मेदारी दी गई।
शिवरात्रि पर लाइसेंस और सुरक्षा उपकरण वाली ही नावों का संचालन किया जाएगा। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि महाशिवरात्रि पर काशी विश्वनाथ धाम आने के लिए भैंसासुर और अस्सी घाट से नावों का संचालन किया जाएगा। इसके साथ ही चार क्रूज को भी पूरे दिन नावों के रूट पर रखा जाएगा। मंदिर चौक के जरिए प्रवेश से सड़कों की भीड़ नियंत्रित होगी।