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तिरपाल लगाने में लापरवाही, अलाव जलाया ही नहीं

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दानगंज/सेवापुरी/लोहता। गोशालाओं में पशुओं को ठंड से बचाव की व्यवस्था नाकाफी है। प्रशासन का दावा है कि जिले के 113 गोशालाओं में ठंड हवा को रोकने के लिए तिरपाल लगाया गया है। लेकिन हकीकत यह है कि इसमें भी खानापूूर्ति की गई है। ठंड हवा टीनशेड में घुस जा रही है और गोवंश ठंड से बेहाल हैं। जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि अलाव के लिए सर्कुलर ही नहीं आया है।
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पिछले साल गोशालाओं में अलाव की व्यवस्था की गई थी लेकिन इस बार ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई। पिंडरा के देवजी, सेवापुरी के भिटकुरी, घोसिला, चोलापुर के बबियाव, लालमन कोट की गोशाला में तिरपाल लगाया गया है, लेकिन जगह-जगह खुला हुआ है। जिला पशु चिकित्सा अधिकारी शिव सिंह ने बताया कि ठंड से बचाव के लिए पशु आश्रय केंद्रों में तिरपाल की व्यवस्था की गई है। पिछले साल अलाव की व्यवस्था थी, लेकिन इस बार शासन से ऐसा सर्कुलर नहीं आया है।
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कई गोशालाओं में गायों की संख्या घटी
चोलापुर के लालमन कोट स्थित गोशाला की क्षमता 100 की है। जहां बीते पांच माह में भूख, ठंड और अन्य कारणों से 15 से 20 गोवंश की मौत हो गई। बेला गांव स्थित 100 की क्षमता वाले गोशाला में बीते दिनों भूख से कई पशुओं की मौत हो गई थी अब यहां मात्र 60 से 70 के करीब गोवंश रह गए हैं। सेवापुरी के भिटकुरी गोशाला में पिछले दिनों भूख से कई गोवंशों की मौत हो गई थी, जिसकी वजह से 250 से 300 क्षमता वाले गोशाला में अब 174 गोवंश हैं।
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1- फोटो---
तिरपाल लगाया लेकिन जगह-जगह खुला छोड़ दिया
चोलापुर विकास खंड के बेला गांव में बने पशु आश्रय स्थल पशुओं के लिए समुचित व्यवस्था नहीं है। ठंड से बचाव के प्लास्टिक के तिरपाल लगाए हैं। लेकिन जगह-जगह खुला छोड़ दिया गया है। इससे पशु ठंड से बेहाल हैं। बृहस्पतिवार को ठंड दो पशुओं की मौत हो चुकी है। केयरटेकर रामप्यारे यादव ने बताया कि 141 पशुओं की क्षमता है, लेकिन 118 पशु हैं। तीन महीने में 25 पशुओं की मौत हो चुकी है।
2-फोटो---
प्लास्टिक के तिरपाल की जगह आधा-अधूरा पर्दा लगाया
काशी विद्यापीठ विकास खंड के लखमीपुर में बने गोशाला में पशुओं के ठंड से बचाव के लिए केवल पर्दा लगाया गया है। यह हवा रोकने में नाकाफी है। प्लास्टिक का तिरपाल लगाने की व्यवस्था होनी चाहिए थी, लेकिन केवल खानापूर्ति की गई है। केयरटेकर ने खुद थोड़ी लकड़ी की व्यवस्था कर आग जलाई थी, उसी के पास गोवंश खड़े होकर ठंड दूर करने का प्रयास करते दिखे।
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फोटो-------
भिटकुरी गांव में बने स्थाई पशु आश्रय केंद्र पर भी लापरवाही
सेवापुरी। मॉडल ब्लॉक सेवापुरी के भिटकुरी गांव में बने स्थाई पशु आश्रय केंद्र पर डेढ़ सौ गोवंश है। यहां पशुओं को ठंड से बचाव के लिए तिरपाल लगाया गया है। वहीं अस्थाई पशु आश्रय केंद्र में 300 पशु हैं यहां भी पशुओं से ठंड से बचाव के लिए तिरपाल लगाया गया है। यहां भी तिरपाल लगाने में भी लापरवाही दिखी। यहां दो तरफ तिरपाल लगा है, जबकि बाकी खुला छोड़ दिया गया है।
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बोले ग्रामीण
गोशालाओं में गायों का संरक्षण ठीक से नहीं होता है। खासकर ठंड के मौसम में। छुट्टे पशुओं को पहले गोशाला में ले जाया जाता है फिर बाद उन्हें छोड़ दिया जाता जो खेतों फसलों को नुकसान पहुंचाते। - हरिशंकर सिंह, पिंडरा
गोशालाओं में पशुओं को आसपास से पकड़कर लाया जाता है लेकिन इनके खाने पीने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं मिलता जिससे कई को मौत का सामना करना पड़ता। गोशाला से कई लोग गाय लेकर पालते है लेकिन इनकी खुराक के लिए प्रशासन की ओर से जरूरत जितना खर्च नहीं मिलता। - बृजेश कुमार, फूलपुर
गोशालाओं में मौजूद पशुओं को भूसे के अलावा खाने की लिए हरा चारा कभी नहीं मिलता। जिससे आये दिन कई गोवंशों की मौत हो जाती है। जिनकी देखरेख के लिए करोड़ों रुपये शासन की ओर से जारी होते है जिसे पंचायत स्तर खर्च ही नहीं किया जाता। - अरविंद रोशन, सेवापुरी
कड़ाके की ठंड में ठीक से अलावा और हरे चारे की व्यवस्था सुचारू रूप से होती तो गोशालाओं में गोवंशों की मृत्यु दर कम होती। इसके अलावा जो लोग व्यक्तिगत तौर पर गोवंशों को पालने के लिए गोद लेते हैं अगर उनको खुराकी का खर्च समय पर मिले तो हर साल सैकड़ों गोवंशों की जान बचाई जा सकती है। - फौजदार यादव, चोलापुर
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