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नवरात्रि 2026: काशी की दुर्गा प्रतिमाओं की धूम, 16 फीट के शेर पर बैठीं मां दुर्गा, शिक्षिका व एलियन रूप में भी

Fri, 09 Oct 2026 01:56 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी की दुर्गा प्रतिमाओं की धूम देशभर में होगी। काशी के कलाकारों की कला ओडिशा, लखनऊ, जबलपुर के अलावा पूर्वांचल में झलकेगी। काशी में 90 फीसदी पूजा पंडाल तैयार हैं, तो देवी मूर्तियां करीब 80 फीसदी तैयार हो चुकी हैं। 
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हथुआ मार्केट में बन रहा पंडाल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी में 11 अक्तूबर से शुरू हो रहे नवरात्र और सप्तमी तिथि से शुरू होने वाली दुर्गा पूजा को लेकर शहर में तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। 90 फीसदी पूजा पंडाल तैयार हैं, तो देवी मूर्तियां करीब 80 फीसदी तैयार हो चुकी हैं। यहां से ओडिशा, लखनऊ, जबलपुर के अलावा पूर्वांचल में काशी के कलाकारों की कला झलकेगी।

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सौ से अधिक माता दुर्गा के अलावा अन्य विग्रहों की प्रतिमाएं जाएंगी। ओडिशा जाने वाली प्रतिमा पहली बार बंगला चाल की प्रतिमा का साज गुलाबी रंग में बना है, जो काफी आकर्षक है।

पूर्वांचल के बाहर 40 प्रतिमाएं जाएंगी। मूर्तिकारों का मानना है कि 80 फीसदी प्रतिमाएं बन कर तैयार हो चुकी हैं। खोजवां कारखाने के मूर्तिकार अभिजीत विश्वास ने बताया कि मूर्तियां बन गई हैं। उनका रंग-रोगन और साज-श्रृंगार बाकी है। उन्होंने बताया कि ओडिशा में बंगला चाल की प्रतिमा जाएगी।
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इस मूर्ति का बंगला साज हमेशा सफेद रंग में होता है, लेकिन इस बार गुलाबी रंग में बना है। वहां माता सहित अन्य विग्रहों में श्रीगणेश जी, लक्ष्मी जी, सरस्वती माता, कार्तिकय, राक्षस सहित आठ प्रतिमाएं हैं। लखनऊ 24 प्रतिमाएं और जबलपुर में आठ जाएंगी। इसके अलावा मिर्जापुर, जौनपुर, गाजीपुर आदि जिलों में 60 से अधिक प्रतिमाएं जाएंगी। अभिजीत विश्वास ने बताया कि इस बार साज-श्रृंगार की सामग्री महंगा होने से मूर्तियों के मूल्य में भी 10 फीसदी की वृद्धि हुई है।

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मिर्जापुर, चंदौली से मंगाई चिकनी मिट्टी
प्रतिमाओं के निर्माण के लिए विशेषकर चिकनी मिट्टी का उपयोग होता है। अभिजीत विश्वास ने बताया कि जलकल विभाग की मिट्टी अब उतनी अच्छी नहीं आ रही है। जबकि चिकनी मिट्टी से मूर्तियों के निर्माण में निखार आता है। यह मिट्टी यहां नहीं मिल पा रहा है। मिर्जापुर और चंदौली से मिट्टी मंगाकर मूर्तियां बनाई है। बाहर से मिट्टी आने से खर्च बढ़ गया है। कामाख्या देवी के रूप में भी बनीं प्रतिमाएं माता 20 से 25 प्रतिमाएं खास हैं, जो माता को अलग-अलग रूप को दर्शाती है। 16 फीट के शेर पर बच्चा के रूप में मां दुर्गा बैठी हैं।
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