51 शक्तिपीठों में गिने जाने वाले मां विशालाक्षी मंदिर में सामान्य दिनों की तुलना में नवरात्र पर भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ गई। प्रदेश सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक नवरात्र के सप्तमी से नवमी तक यहां 20 से 30 हजार श्रद्धालु रोज़ाना पहुंचे। वाराणसी के गायत्री शक्ति पीठ चौरा देवी मंदिर में नवमी तक एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु आए। दुर्गाकुंड स्थित मां कूष्मांडा मंदिर में नवरात्र के नौ दिनों में 12 लाख से ज्यादा भक्त पहुंचे। यहां अंतिम तीन दिनों में प्रतिदिन करीब दो लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
मां विंध्यवासिनी धाम: रोजाना लाखों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
मीरजापुर स्थित मां विंध्यवासिनी का मंदिर प्रदेश का सबसे प्रमुख सिद्धपीठ माना जाता है। यहां रोजाना औसतन 4 से 5 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। आम दिनों की तुलना में यह संख्या कई गुना ज्यादा है।विंध्याचल कॉरिडोर ने श्रद्धालुओं को नई सहूलियत दी है। नवरात्र के अंतिम तीन दिनों में रोज़ाना 6 से 7 लाख श्रद्धालुओं ने माता की आराधना की आराधना की है।
मंदिर परिसर में परकोटा, चौड़ी परिक्रमा पथ, यात्री शेड, चौड़े मार्ग और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था ने भीड़ प्रबंधन को आसान बना दिया है। यहां भक्त बिना धक्का-मुक्की के सहज रूप से दर्शन कर पा रहे हैं। आस्था और विकास का यह मेल विंध्याचल को न केवल राष्ट्रीय, बल्कि वैश्विक तीर्थ पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित कर रहा है।
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