अध्ययन की पहली लेखिका अंजना वेलिकाला ने कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप में हर जाति या जनजाति अपनी पड़ोसी आबादी के साथ ज्यादा जीन संबंध दिखाती है, जिसे आइसोलेशन-बाई-डिस्टेंस मॉडल कहते हैं। इसके उलट यह खोज आइसोलेशन-बाई-डिस्टेंस मॉडल को चुनौती देती है और यह शोध डीएनए अध्ययन के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
शोधकर्ताओं ने बताया कि इस शोध के व्यापक निहितार्थ हैं, जो न केवल श्रीलंका बल्कि दक्षिण एशिया क्षेत्र के जनसांख्यिकीय इतिहास को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करता है। यह अध्ययन दक्षिण एशिया में मानव प्रवास और आनुवंशिक विविधता की जटिलताएं बताता है।
इससे पता चलता है कि कैसे वेद्दा ने अपने आसपास के सांस्कृतिक और भाषाई परिवर्तनों के बावजूद सहस्राब्दियों से अपनी आनुवंशिक पहचान को संरक्षित रखा है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि यह शोध दक्षिण एशिया में आनुवंशिक विविधता की बेहतर समझ में योगदान करेगा और वेद्दा लोगों की अद्वितीय सांस्कृतिक और आनुवंशिक विरासत को सहेजने का संदेश देगा।