वाराणसी में नाना पाटेकर
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सेंसर बोर्ड के दायरे में होने चाहिए ओटीटी प्लेटफॉर्म्स
गदर-2 के बाद जर्नी फिल्म का निर्देशन कर रहे अनिल शर्मा ने शूटिंग के दौरान मीडिया से कहा कि सेंसर बोर्ड के दायरे में नहीं होने के चलते ओटीटी कुछ ज्यादा ही बोल्ड हो गया है। इसे उचित नहीं कहा जा सकता। बेशक यह हमारे हाथ में है कि हम क्या देखें, क्या ना देखें लेकिन इसका यह कतई यह मतलब नहीं है कि दर्शकों को कुछ भी परोसा जाए। किसी को भी बाउंड्री लाइन तोड़ने का हक नहीं है। यह भी सच है कि ओटीटी के कारण कई लोगों को काम मिला है। कई नए कलाकार चमके हैं लेकिन इसे सेंसर बोर्ड के दायरे में लाया जाना चाहिए।
बनारस की कहानी में काम करना ही मेरे के लिए नया अनुभव
अभिनेता नाना पाटेकर ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि बनारस की कहानियां खूब सुनी हैं। मगर, पहली बार बनारस के अलमस्त जिंदगी पर बन रही फिल्म में काम करने का मेरा अनुभव बिल्कुल नया है। जर्नी की कहानी में थोड़े आंसू और ज्यादा खुशी है। मैं तो बनारस को महसूस भी कर रहा हूं।
गुरु अब बनारस में पहले वाला मजा नहीं
शूटिंग के बीच समय निकालकर घूमने निकले अभिनेता संजय मिश्र ने कहा कि गुरु, बनारस में अब पहले वाला मजा नहीं रहा। यहां के लोग बदल गए हैं। बनारस में सुधार हुआ है, लेकिन यहां के इंसान बर्बाद हो गए हैं। बनारसगिरी जिंदा रखो यही बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि जब समय मिलता है बनारस आ जाता हूं।