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Varanasi News: मेडिकल एस्ट्रोलॉजी का केंद्र बनेगा नैमिषारण्य, वैदिक विज्ञान की सभी विधाओं में होंगे शोध कार्य

Fri, 10 May 2024 06:13 PM IST
अमन विश्वकर्मा आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Varanasi News: शोध के जरिए मेडिकल और ज्योतिष के क्षेत्र में होने वाले बदलाव से देश और दुनिया को लाभ होगा। धर्मार्थ कार्य विभाग के संयुक्त निदेशक विश्वभूषण मिश्र ने बताया कि केंद्रीय तिब्बती संस्थान से मेडिकल एस्ट्रोलॉजी में सहयोग के लिए बातचीत की गई है। संस्थान के कुलपति ने इसमें सहयोग में रूचि दिखाई है।
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वेद, पुराण और मंत्रों पर शोध का वैश्विक केंद्र के रूप में नैमिषारण्य को विकसित किया जाएगा। वैदिक विज्ञान की सभी विधाओं में यहां पर शोध कार्य होंगे जिसका लाभ देश ही नहीं संपूर्ण विश्व को होगा। प्रदेश सरकार की मंशा के अनुसार धर्मार्थ कार्य विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं और चुनाव के बाद इस दिशा में कार्य भी शुरू हो जाएगा। अमेरिका से भी कई विद्वानों ने वेद विज्ञान केंद्र में सहयोग के लिए रूचि दिखाई है।

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सीतापुर के नैमिषारण्य में पांच एकड़ जमीन पर शुरू होने वाले वेद विज्ञान केंद्र की रूपरेखा धर्मार्थ कार्य विभाग ने तैयार कर ली है। वैदिक विज्ञान की सभी धाराओं में शोध होगा। इसके लिए देश के प्रमुख शोध संस्थान, आईआईटी, संस्कृत विश्वविद्यालय और तिब्बती संस्थान के साथ ही अमेरिका व लंदन के विज्ञानियों का भी प्रस्ताव मिला है। 

धर्मार्थ कार्य विभाग को लंदन के क्लीनिकल सायकोलॉजिस्ट डॉ. दिवाकर शुक्ला, वैदिक मैथ फोरम के अध्यक्ष गौरवी टेकरीवाल, यूनिवर्सिटी आफ एप्लाइड वैदिक साइंसेज कैलिफोर्निया यूएसए के डॉ. वेंकट ने वैदिक विज्ञान केंद्र में शोध व सहयोग के लिए प्रस्ताव भेजा है। सरकार ने नैमिषारण्य में लगभग पांच एकड़ भूमि आवंटित की है और अनुसंधान केंद्र की स्थापना के लिए 25 करोड़ की धनराशि जारी कर दी गई है।
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तिब्बती संस्थान के सहयोग से मेडिकल एस्ट्रोलॉजी में होगा शोध
वेद विज्ञान केंद्र में मेडिकल एस्ट्रोलॉजी पर शोध के लिए केंद्रीय तिब्बती संस्थान के सहयोग के लिए धर्मार्थ कार्य विभाग ने पहल की है। तिब्बती संस्थान में संचालित होने वाले पाठ्यक्रम मेडिकल एस्ट्रोलॉजी व चिकित्सा पद्धति सोवा रिंग्पा को केंद्र में रखकर शोध कार्य किए जाएंगे।

अमेरिका और लंदन से वेद विज्ञान केंद्र में सहयोग के लिए प्रस्ताव आए हैं। वहीं देश भर के कई संस्थानों से भी लगातार प्रस्ताव आ रहे हैं। चुनाव के बाद इस दिशा में कार्य शुरू हो जाएंगे। - विश्वभूषण मिश्र, संयुक्त निदेशक, धर्मार्थ कार्य विभाग



वेद विज्ञान अध्ययन केंद्र की स्थापना के बाद वेदों एवं पुराणों में संरक्षित ज्ञान के अध्ययन के बाद इसे आमजन के बीच ले जाएंगे। वेद मंत्रों पर शोध के बाद इसका लाभ आम जन को मिलेगा। वेद विज्ञान केंद्र में प्रशासनिक भवन, शैक्षणिक भवन, गुरुकुल, योगशाला, यज्ञशाला, मंदिर के साथ ही खगोलशास्त्र व ज्योतिष के विद्यार्थियों के लिए वेधशाला भी स्थापित होगी।

शोध ग्रंथों का प्रकाशन, तैयार होंगे पाठ्यक्रम
नैमिषारण्य में वैदिक विज्ञान केंद्र में वेद विज्ञान से संबंधित विषयों को जोड़ते हुए अनुसंधान और प्रकाशन का काम किया जाएगा। इसके साथ ही वैदिक विषयों के पाठ्यक्रम भी तैयार होंगे। इसमें वैदिक गणित, वैदिक विधिशास्त्र, वैदिक योग विज्ञान, वैदिक पर्यावरण, वैदिक वन औषधियां एवं वनस्पति के पाठ्यक्रम को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा वैदिक वास्तुशास्त्र, भौतिक एवं इंस्ट्रूमेंटल में परास्नातक कोर्स शुरू होंगे। केंद्र में बनने वाले विशिष्ट संग्रहालय में वैदिक ग्रंथ उपलब्ध होंगे।

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने खोजे रामायण और महाभारत काल के 88 हजार पौधे
18 पुराणों के अनुसार 88 हजार ऋषियों की तपस्थली पर रामायण और महाभारत काल के 88 हजार पौधों को लगाए जाएंगे। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने वेद, पुराण के अध्ययन के बाद इन पौधों को चिन्हित किया है। इसकी रिपोर्ट भी शासन को भेज दी गई है।
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इसमें त्रेता और द्वापर युग में नैमिषारण्य में पाए जाने वाले 88 हजार वृक्षों को 26 सदस्यीय समिति ने चिह्नित किया है। इसमें नीम, आम, पीपल, बरगद, जामुन, पलाश, आंवला, खैर, पित्र पापड़ा, चंदन, चमेली, परवल, तेंदू, अर्जुन, मधुक (महुआ), कदंब, इमली, शमी, सुपारी, पनस, मर्कटी, जयंत करवीर, बेल आदि शामिल हैं।

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