लमही स्थित मुंशी प्रेमचंद स्मृति द्वार पर प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
नजमा परवीन ने कहा कि श्रीराम चरित मानस दुनिया का पवित्रतम धर्म ग्रंथ है। यह सिर्फ सनातन धर्म के लिए ही नहीं, बल्कि विश्व के प्रत्येक नागरिकों के लिए उपयोगी है। मानस पर टिप्पणी करने वाला स्वामी प्रसाद अधर्मी और पापी है। सरकार से मांग किया कि स्वामी प्रसाद मौर्य को जेल भेजा जाए। साथ ही संपत्ति भी जब्त की जाए। रामचरित मानस पर विवादित टिप्पणी और प्रतियां जलाने वालों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की जाए। दलित चिंतक ज्ञान प्रकाश ने कहा कि श्री रामचरित मानस की वजह से दलितों को सम्मान मिलता है।
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स्वामी प्रसाद मौर्य ने श्री रामचरित मानस का नहीं बल्कि दलित समाज का अपमान किया है। दलित समाज के लोग स्वामी प्रसाद और उसके दल का घर-घर बहिष्कार करेंगे। जो भगवान श्रीराम के विरुद्ध होगा उसका पूर्णतः बहिष्कार किया जाएगा।
लमही स्थित मुंशी प्रेमचंद स्मृति द्वार पर प्रदर्शन
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मुस्लिम महिलाओं की नेता नाजनीन अंसारी ने कहा कि जिसने श्रीराम चरित मानस को पढ़ां नहीं वह अशोभनीय टिप्पणी कर रहा है। विदेश से पैसा मिला होगा तभी ये देश में हिंसा और नफरत फैलाने की साजिश कर रहा है। भगवान श्रीराम अखंड ब्रह्माण्ड के नायक हैं। भगवान राम सबके पूर्वज हैं। धर्म बदलने से पूर्वज नहीं बदलते। स्वामी प्रसाद के बयान को सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान में लेकर इसको दंडित करे।