टूटी पड़ी मुंशी प्रेमचंद के घर की पानी की टंकी।
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कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जन्मस्थली को विकसित करने के लिए वर्षों पहले बनी कार्ययोजना में लापरवाही के चलते गांव में जमीन का विवाद शुरू हो गया था। बार-बार शिकायत के बाद भी विकास प्राधिकरण की खानापूर्ति के चलते मुंशी प्रेमचंद के गांव को संवारने की योजना लटक जा रही है। कई साल पहले जन्मस्थली को विकसित करने के लिए ली गई जमीन खारिज-दाखिल नहीं होने के चलते विवादित हो गई। उधर, जमीन को गांव के ही एक व्यक्ति ने बैनामा करा लिया।
दरअसल, मुंशी प्रेमचंद की जन्मस्थली के पास बने पुस्तकालय के सामने 21 विस्वा जमीन कई साल पहले वीडीए को दी गई थी। मगर, तहसील में नाम चढ़ने से पहले जमीन मालिक ने उसे गांव के ही एक व्यक्ति को बेच दी। जमीन खरीदने वाला व्यक्ति मुंशी प्रेमचंद के परिवार से जुड़ा होने के कारण वह आसपास की जमीनों पर भी दावा करने लगा।
पुस्तकालय की जमीन को अपना बताते हुए कटरे के बगल में बने पानी की टंकी को गिरवा दिया। यह देख ग्रामीणों ने विरोध किया और जमीन को अपना बताते हुए काम रोक दिया। दूसरे गुट की शिकायत पर वीडीए अधिकारियों ने दौराकर अपनी रिपोर्ट तैयार की।
उधर, पेयजल की क़िल्लत को देखते हुए गांव के प्रधान संतोष पटेल ने प्रेमचंद सरोवर के पास एक प्लास्टिक की टंकी लगवाया और कनेक्शन करवाकर स्मारक और पुस्तकालय में पानी की आपूर्ति बहाल करवाया दिया है। मामले में वाराणसी डीएम कौशल राज शर्मा ने कहा कि तहसील की टीम ने पानी की टंकी को गलत तरीके से तोड़ना पाया गया है। वीडीए अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि पड़ताल कर पूरे मामले से अवगत कराएं। यदि जरूरत हुई तो टंकी तोड़ने वाले और जमीन कब्जा करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
वाराणसी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष ईशा दूहन ने कहा कि पानी की टंकी तोड़ने वाले व्यक्ति को चिह्नित कर लिया गया है। नोटिस जारी कर वसूली की जाएगी और पानी की टंकी का निर्माण कराया जाएगा।
कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद का वाराणसी के लमही स्थित घर की पानी की टंकी परिवार के आपसी विवाद में तोड़ दी गई। पुस्तकालय के पास की जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है। शिकायत के बाद तहसील और विकास प्राधिकरण की टीम भी मंगलवार को मौके पर पहुंची। जांच में पानी की टंकी तोड़ने की शिकायत सही पाई गई, ऐसे में अब पानी की टंकी तोड़ने वालों से वसूली के लिए नोटिस जारी किया जा रहा है।
दरअसल, मुंशी प्रेमचंद की जन्मस्थली पर बने आवास को संरक्षित करने के लिए विकास प्राधिकरण ने कई साल पहले पुस्तकालय के सामने की जमीन का बैनामा कराया था। इसी के पास तत्कालीन मंडलायुक्त सुरेश चंद्रा ने पानी की टंकी बनवाकर उससे पुस्तकालय और आवास में पेयजल की आपूर्ति शुरू कराई थी। इस बीच मुंशी प्रेमचंद के परिवार से जुड़े लोग जमीन पर कब्जा करने को लेकर विवाद करने लगे। एक गुट ने पुस्तकालय की जमीन पर दावा करते हुए पानी की टंकी गिरवा दिया। इसके बाद दूसरे गुट ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा से की।