इसमें मठ, मंदिर की स्थापना, संपत्ति, महंत सहित एक एक जानकारी अब सरकार के पास होगी। काशी में निदेशालय की स्थापना के बाद प्रदेश की धार्मिक गतिविधियों और योजनाओं की निगरानी होगी। धर्मार्थ कार्य मंत्रालय के गठन के करीब 35 साल बाद निदेशालय की स्थापना सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रदेश के सभी मठ, मंदिर और सार्वजनिक हिन्दू संपत्तियों का पूरा ब्योरा तैयार किया जाएगा। दरअसल, श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर विस्तारीकरण व सुंदरीकरण परियोजना शुरू होने के बाद से ही धर्मार्थ कार्य विभाग की जरूरत महसूस की जा रही थी। बनारस से ही चित्रकूट, गोरखपुर, विंध्याचल समेत सभी प्रमुख मठ मंदिर की विकास योजनाओं का खाका तैयार किया जाएगा।
संस्कृति, पर्यटन व धर्मार्थ कार्य मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि धर्मार्थ कार्य विभाग के निदेशक के पद की जिम्मेदारी मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल को दी गई है। विभाग के प्रस्ताव को कैबिनेट ने पास किया था। इससे प्रदेशभर की धार्मिक गतिविधियों के संचालन व निगरानी में सहूलियत होगी।