मुहर्रम पर हर साल हकीम मोहम्मद काजिम के दालमंडी स्थित अजाखाने से उठने वाले लुटे हुए काफिले का जुलूस नहीं उठ सका। 11वीं मुहर्रम पर कोरोना संक्रमण के कारण मजलिस की रवायत निभाई गई।
सोमवार को 11वीं मुहर्रम को जुलूस से पहले होने वाली मजलिस भी लोगों के बीच संपन्न हुई। मजलिस को खिताब हरदिल मौलाना अकील हसन ने किया। उसके बाद हाजी फरमान हैदर, शुजात हुसैन, सरफराज हुसैन तथा समर शिवालवी ने खिताब किया। मजलिस का आयोजन मुर्तुजा जाफ रीए जीशान जाफरी ने किया। महिलाओं की मजलिस को नुजहत फरमान ने खिताब किया। इसमें नुसरत फ ातिमा, वाजिहा ने नौहा ख्वानी की। मजलिस का आयोजन शाहिदा हैदर ने किया। लुटे हुए काफिले का जुलूस उस काफिले की याद में उठाया जाता है जो कि कर्बला से 11 मोहर्रम को निकला था। इस सफर में हुसैन के काफि ले के सभी बच्चे शहीद हो गए सिर्फ 1 बच्चा जनाब बाकिर बचे जो कि बाद में शिया इस्लाम के 5 वें इमाम बने। कर्बला में हुए कत्ल ए आम की कहानी को सभी लोगों तक पहुंचाने में जनाब ए जैनब की मुख्य भूमिका रहीं। उनका यजीद के दरबार में दिए गए भाषण ने यजीद के तख्त को हिला दिया। इस भाषण के बाद से यजीदी हुकूमत कभी संभल नहीं पाई और विद्रोह पर विद्रोह झेलने पड़े।