सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि गांव हमारी संस्कृति और अर्थव्यवस्था का आधार है। गांव के विकास के बिना परम वैभव की प्राप्ति संभव नहीं है। देश के सभी गांव का विकास हो ग्रामीण जन सुख और समृद्धि को प्राप्त हों। यह ग्राम गतिविधि का उद्देश्य है।
उन्होंने धर्म-संस्कृति के प्रति आस्थावान रहने को भी जरूरी बताया। काशी प्रवास के दूसरे दिन शनिवार को बड़ा लालपुर स्थित हस्तकला संकुल में हुई चार सत्रों की बैठक में संघ प्रमुख ने पांच गतिविधियों पर चर्चा की।
उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता सामाजिक कुरीतियों, विकृतियों का परिष्कार कर भेदभाव रहित समरस समाज की स्थापना के लिए प्रयासरत है। गाय सनातन काल से हम सबके लिए पूज्य है। हमारा गाय के साथ माता और पुत्र का संबंध है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था गाय आधारित और सुदृढ़ हो। कुटुंब प्रबोधन गतिविधि पर कहा कि परिवार भारतीय संस्कृति का सनातन आधार है। जो संघकालीन जीवनशैली में थी।
परिवार में संवाद, संस्कार, संवेदना का वातावरण बना रहे। यह समाज भावी पीढ़ी के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। इस कार्य को कुटुंब प्रबोधन गतिविधि संपन्न करती है।
बैठक के समापन पर संघ प्रमुख ने कहा कि धर्म और संस्कृति के प्रति समाज के लोगों की आस्था बनी रहे। सभी छल दंभपूर्ण असमाजिक कार्य रुकें। राष्ट्र सुरक्षित रहे इसके लिए धर्म जागरण समन्वय का कार्य करता है।
संघ के सभी कार्यकर्ता तन-मन-धन पूर्वक पांचों गतिविधियों के प्रति सजग होकर राष्ट्र देवता की सेवा में रत रहें। इस बैठक में विभिन्न क्षेत्रों सामाजिक समरसता, ग्रामीण विकास, कुटुंब प्रबोधन, गौ रक्षा और धर्म जागरण समन्वय के पूर्वी उत्तर प्रदेश के 49 जिलों के कार्यकर्ता और राष्ट्रीय पदाधिकारी मौजूद रहे।