वाराणसी पहुंचे श्राइन बोर्ड के सदस्यों ने बताया कि श्री काशी विश्वनाथ धाम की हर व्यवस्था अद्भुत और प्रशंसनीय है। भीड़ प्रबंधन की बात हो चाहे श्रद्धालुओं की सुविधा की। मोक्ष धाम, फूड कोर्ट, ऑडिटोरियम और दुकानों के इंतजाम बेहतरीन हैं। हर मामले में धाम का मॉडल मंदिरों में लागू किया जा सकता है। हालांकि माता वैष्णो देवी की भौगोलिक स्थितियां अलग हैं। माता के दर पर आने वाले श्रद्धालु 13 किलोमीटर का सफर तय कर मां के दरबार में पहुंचते हैं। एनजीटी के दिशा निर्देशों के अनुसार एक बार में 40 हजार श्रद्धालु ही मंदिर जाने वाले मार्ग पर रह सकते हैं।
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सदस्यों ने बताया कि काशी विश्वनाथ धाम की व्यवस्थाओं पर वह अपनी रिपोर्ट श्राइन बोर्ड को सौंपेंगे और इसके आधार पर ही भविष्य की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। यहां बता दें कि लोकार्पण के बाद नव्य, भव्य और दिव्य श्री काशी विश्वनाथ का धाम देश भर के मंदिरों के लिए उदाहरण बना है। ना केवल भीड़ प्रबंधन बल्कि दर्शनार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं में भी विश्वनाथ धाम अव्वल है। धाम की तर्ज पर ही विंध्याचल में कॉरिडोर का निर्माण हो रहा है। वहीं उज्जैन समेत दक्षिण भारत के कई मंदिरों में भीड़ प्रबंधन के लिए श्री काशी विश्वनाथ धाम का मॉडल अपनाया जा रहा है।
अब वैष्णो देवी के श्रद्धालु देखेंगे काशी की गंगा आरती
वाराणसी। माता वैष्णो देवी के धाम में आने वाले श्रद्धालु भी अब काशी की गंगा आरती देख सकेंगे। बाणगंगा पर गंगा घाट की तर्ज पर जल्द ही आरती की शुरुआत हो सकती है। माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के सदस्यों को मां गंगा की आरती ने इतना भाव विभोर कर दिया है कि उन्होंने मां गंगा की आरती को भी अपनी रिपोर्ट में शामिल किया है। सदस्यों का कहना है कि बाणगंगा पर गंगा आरती की तर्ज पर आरती की शुरुआत हो सकती है।
IRCTC Tour Package for Vaishno Devi From Delhi
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बदल गया है आज का बनारस
बनारस भ्रमण पर पहुंचे माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के सदस्यों ने कहा कि बनारस बहुत बदल गया है। हमने पहले का भी बनारस देखा था और आज का बनारस भी देख रहे हैं। बनारस ने विकास के जो आयाम गढ़े हैं वह देश भर में विकास का नया मॉडल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संकल्पना के अनुसार ही बनारस विकसित हो रहा है।
अध्ययन करने पहुंचा है दल
श्री काशी विश्वनाथ न्यास परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील वर्मा ने बताया कि माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के सदस्य श्री काशी विश्वनाथ धाम की व्यवस्था को देखने और अध्ययन करने के लिए पहुंचे हैं। उन्होंने भीड़ नियंत्रण, बाबा का भोग प्रसाद, अन्न क्षेत्र, साफ-सफाई, मानव संसाधन प्रबंधन, रेवेन्यू जनरेशन समेत अन्य व्यवस्थाओं को भी देखा और सराहना की। इसके साथ ही श्री काशी विश्वनाथ धाम में त्योहारों के दौरान होने वाले आयोजनों के बारे में भी जानकारी ली। इसके पहले महाकाल, महाराष्ट्र के विठ्ठल नाथ, मथुरा व वृंदावन मंदिर के लोग भी यहां की व्यवस्थाओं का अध्ययन करने के लिए आ चुके हैं।
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एक साल में सात करोड़ से अधिक पहुंचे श्रद्धालु
दिसंबर 2021 में श्री काशी विश्वनाथ धाम के उद्घाटन के बाद एक साल में ही लगभग 7.35 करोड़ श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई है। इस दौरान बाबा को 100 करोड़ से अधिक का चढ़ावा चढ़ा है। नए साल के पहले दिन ही करीब सात लाख व सावन के महीने में सवा करोड़ भक्तों ने बाबा के दर्शन किए थे।
माता के प्रसाद की तरह मिलेगा बाबा का आशीर्वाद
वैष्णों देवी दरबार में दर्शन पूजन के बाद लौटते समय माता के प्रतीक के रूप में सिक्का और प्रसाद का वितरण निशुल्क किया जाता है। काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने इसकी पूरी जानकारी श्राइन बोर्ड के सदस्यों से ली है। बाबा दरबार में भी महादेव के आशीर्वाद के रूप में कुछ सामग्री वितरण करने की योजना बनाई जा रही है।
श्राइन बोर्ड के सामने होंगी चुनौतियां
- वैष्णो देवी और काशी विश्वनाथ धाम की भौगोलिक स्थितियां अलग-अलग हैं
- माता वैष्णो दरबार से बाण गंगा तक 13 किलोमीटर का पैदल मार्ग
- एक बार में 40 हजार से ज्यादा श्रद्धालु नहीं जा सकते हैं मंदिर के ट्रैक पर