पुलिस के अनुसार, सीबीआई की जांच के दौरान मुकदमे से मुख्तार अंसारी और विजय मिश्र का नाम निकाल दिया गया था। जबकि, मुख्तार गैंग के दो सदस्यों अताउर्रहमान उर्फ बाबू और शहाबुद्दीन पर सीबीआई की ओर से दो-दो लाख का इनाम घोषित किया गया। बाद में सीबीआई ने मुकदमे को दाखिल दफ्तर कर दिया था।
पूर्वांचल के अन्य चर्चित मामलों में 2002 में भदोही के गोपीगंज क्षेत्र के घनश्यामपुर गांव में पूर्व सांसद गोरखनाथ पांडेय के भाई रामेश्वर पांडेय की हत्या, प्रयागराज में 2003 में डीआईजी के यहां तैनात सिपाही सूर्यमणि मिश्रा की हत्या, प्रदेश के पूर्व मंत्री राकेश धर त्रिपाठी के भाई डॉ. धरणीधर त्रिपाठी की हत्या और जुलाई 2010 में प्रयागराज में मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी पर जानलेवा हमले के मामले में विजय मिश्र का नाम आया।
भदोही पुलिस का दावा है कि विजय मिश्रा के खिलाफ अलग-अलग आपराधिक आरोपों में 73 मुकदमे दर्ज हैं।
राजनीतिक विरोधियों की सूची लंबी, एकजुट होकर बढ़ाएंगे मुश्किलें
विधायक विजय मिश्र के राजनीतिक विरोधियों की सूची बड़ी लंबी है। प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री राकेशधर त्रिपाठी और पूर्व सांसद गोरखनाथ पांडेय अपने-अपने भाई की हत्या आज भी नहीं भूल पाए हैं। प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री रंगनाथ मिश्र के अलावा हाल ही में मुखर हुए भाजपा विधायक रवींद्रनाथ त्रिपाठी से भी विजय मिश्र की सियासी अदावत छुपी नहीं है।
प्रयागराज के शूटर दिलीप मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद पहले करीबी रहे एक ब्लॉक प्रमुख सहित दो नेता भी विजय मिश्र के खिलाफ चल रहे हैं। पूर्वांचल की सियासत और जरायम जगत को बारीकी से समझने वालों का मानना है कि आने वाले दिनों में विजय मिश्र के राजनीतिक विरोधी एकजुट होकर उनकी मुश्किलें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरीकों से बढ़ाएंगे।