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मिर्जापुर हादसा : एक खानदान के तीन युवकों और एक किशोर की जान गई, दर्दनाक घटना के बाद घरों में नहीं जले चूल्हे

Sat, 05 Oct 2024 06:01 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: मिर्जापुर जिले के कटका गांव के पास प्रयागराज-वाराणसी नेशनल हाईवे पर तेज रफ्तार ट्रक की टक्कर से बाइक और ट्रैक्टर-मिक्सर मशीन सवार 10 लोगों की मौत हो गई थी। शुक्रवार की भोर मिर्जामुराद थाना क्षेत्र की रामसिंहपुर ग्राम पंचायत की बीरबलपुर बस्ती में रहने वाले ग्रामीणों को उनके परिजनों की मौत की जानकारी मिली तो चौतरफा चीख-पुकार मच गई। रोते-बिलखते ग्रामीण एक-दूसरे को ढांढस बंधाते हुए घटनास्थल की ओर भागे थे।
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दर्दनाक हादसे के दूसरे दिन भी गांव में छाया रहा मातम। - फोटो : अमर उजाला
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मिर्जापुर में शुक्रवार की भोर में हुए दर्दनाक हादसे के बाद वाराणसी के मिर्जामुराद स्थित बीरबलपुर बस्ती में दूसरे दिन यानी शनिवार को भी मातम का माहौल रहा। कई घरों में चूल्हे नहीं जले। गांव का हर आदमी पीड़ित परिवार के सदस्यों को ढांढस बंधाता दिखा। कहीं बूढ़े पिता गमगीन बैठे थे तो कहीं बच्चे अपनी बेसुध मां को देख रहे थे। इस बीच सिर्फ एक ही बात चर्चा में रही कि अब पीड़ित परिवार का गुजर-बसर कैसे होगा?

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कटका के समीप सड़क हादसे में बीरबलपुर बस्ती के एक खानदान के तीन युवकों और एक किशोर की मौत हो गई। अपने बेटे अनिल और सरोज की हादसे में मौत की सूचना पाकर पिता हूबलाल बेहोश हो गए। हूबलाल के भाई कन्हैया लाल के बेटे राकेश कुमार उर्फ मुन्ना की भी सड़क हादसे में मौत हुई है। इसके अलावा हूबलाल के एक अन्य भाई भगेलू का पोते रोशन ने भी हादसे में जान गंवा दी। खानदान के तीन युवकों और एक किशोर की मौत को लेकर घर की महिलाओं और पुरुषों की हालत बेसुधों जैसी थी।

अनाथ हुए बच्चों अमित व आकाश का स्पॉन्सर योजना के तहत फॉर्म भरते हुए। - फोटो : अमर उजाला
15 की मौत... लाशें गायब करने की उड़ी अफवाह, दो बार लगाया जाम 
दुर्घटना के बाद क्षत-विक्षत शव और वाहन के इधर-उधर बिखरे हिस्से बता रहे थे कि हादसा कितना भयावह रहा होगा। इसी बीच अफवाह फैली की हादसे में 17-18 लोग मर गए हैं। फिर 15 की चर्चा होने लगी। मौके पर पहुंची पुलिस ने बचाव कार्य शुरू किया तो लाशें छिपाने के आरोप भी लगे। 

एक बार स्थानीय ग्रामीणों ने हाईवे जाम करने का प्रयास किया, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रियता पर कुछ मिनट बाद ही जाम खुलवा दिया गया।

सुबह फिर मिर्जामुराद से आए परिजनों ने घटनास्थल के समीप जाम लगा दिया। इससे हाईवे के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई। परिजनों का कहना था कि पुलिस मरने वालों की संख्या छिपा रही है, लाशें गायब कर रही है। पुलिस अधिकारियों ने लोगों को समझाया। मौके पर पहुंचे एसडीएम गुलाब चंद्र और सीओ अमर बहादुर ने प्रशासनिक मदद का भरोसा दिलाया। इसके बाद लोगों ने जाम खोला। 
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बेटे की मौत की खबर सुनते आंसुओं से भर गईं पिता की आंखें। - फोटो : अमर उजाला
जूते-मोजे उतारकर नाले में उतरे पुलिसकर्मी, तीन की जान बचाई
हादसे की सूचना पर जब पुलिस मौके पर पहुंची तो वहां सड़क पर मानव अंग बिखरे पड़े थे। सड़क किनारे नाले में वाहन के नीचे कई लोग दबे थे। कुछ शवों के अंग कटे पड़े थे। घटनास्थल पर भीड़ ज्यादा थी। पुलिसकर्मियों ने राहत बचाव कार्य की जिम्मेदारी संभाली। क्षत-विक्षत शवों को एकत्रित कर उन्हें संरक्षित किया गया। 

जूता-मोजा उतार कर कई पुलिसकर्मी नाले में उतर गए। वहां दबे लोगों को बाहर निकाला। पुलिस कर्मियों की सक्रियता से तीन लोगों की जान बच पाई। वहां मौजूद लोगों ने जब यह नजारा देखा तो वह भी आगे आकर पुलिसकर्मियों की मदद करने लगे। 

समय से आ जाती क्रेन तो बच सकती थीं कुछ और जानें
दुर्घटना के बाद कई लोग वाहनों के नीचे दबे थे और उनके कराहने की आवाज आ रही थी। पुलिस और स्थानीय लोगों ने उनको निकालने का प्रयास किया मगर सफलता नहीं मिल पाई। गोपीगंज से क्रेन के पहुंचने से पहले उनकी सांसें थम चुकी थीं। लोगों में चर्चा थी कि अगर समय से क्रेन मिल जाती तो शायद कुछ और लोग जिंदा बच जाते। ट्रैक्टर के पीछे लगे मिक्सर के नीचे दबे लोगों को बचाया नहीं जा सका। 

ट्रैक्टर और मिक्सर के उड़े परखचे
ट्रक की टक्कर से ट्रैक्टर और मिक्सर के परखचे उड़ गए थे। ट्रैक्टर के आगे के दोनों पहिये बाहर निकल गए थे। बाइक भी नाले में पड़ी थी। हाईवे की सेफ्टी रेलिंग भी करीब 10 मीटर तक टूटी थी। रोड लाइट का पोल भी टूट गया था। सड़क पर वाहन के घिसटने के निशान नजर आ रहे थे। 
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