स्मार्ट शहरों की सूची में शामिल होने के बाद काशी को साफ-सुथरा रखने के लिए नगर निगम के अलावा तीन निजी एजेंसियों को लगाया गया है। सफाई व्यवस्था के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। दूसरी तरफ नगर निगम और निजी संस्थाओं के बीच शुरू हुए खेल में शहर में गंदगी और फैल गई है। कई जगह कूड़े के ढेर दो-दो दिन लगे रहते हैं। शहर के पॉश इलाकों, श्रद्धालुओं के पवित्र स्थल गंगा घाटों पर कूड़ा और कचरा फैला हुआ है। शहर में 600 मीट्रिक टन कूड़ा रोजाना निकलता है लेकिन करसड़ा कूड़ा निस्तारण प्लांट की क्षमता 500 एमटी है। जाहिर है कि बाकी का 100 मीट्रिक टन कूड़ा वहां तक पहुंचता ही नहीं है)
इस बीच शहर में चल रहे विकास कार्यों, स्वच्छता अभियान और जल आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा करने के लिए प्रदेश के संसदीय, नगर विकास, शहरी समग्र विकास एवं गरीबी उन्मूलन मंत्री सुरेश खन्ना एवं नगर विकास, अभाव सहायता एवं पुनर्वास राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव शनिवार को शहर आ रहे हैं। अगर दोनों मंत्रियों ने कुछ इलाकों का मौका-मुआयना कर लिया तो सच्चाई उनके सामने आ सकती है।
बता दें कि योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद संभालने के कुछ दिन बाद वाराणसी के विकास कार्यों की समीक्षा की थी। इस दौरान उन्होंने दिशानिर्देश देने के साथ-साथ यह भी तय कर दिया था कि उनके मंत्री सुरेश खन्ना 15 अप्रैल को यहां का दौरा कर विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे। समझा जाता है कि खन्ना की रिपोर्ट के बाद ही मई में मुख्यमंत्री का वाराणसी दौरा तय होगा। शहर के नागरिक मानते हैं कि खन्ना और यादव पीएम के संसदीय क्षेत्र में जवाबदेह अधिकारियों-कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई किए बगैर न विकास के कार्य गति पकड़ पाएंगे और न ही स्वच्छता की मुहिम आगे बढ़ेगी।
जानना जरूरी है कि शहर की सफाई व्यवस्था के लिए नगर निगम के 2300 से अधिक सफाई कर्मचारी तैनात हैं। इसके अलावा पक्के महाल के 14 वार्डों और गंगा घाटों की नियमित सफाई के लिए आईएलएफएस कंपनी को तीन साल के लिए लगाया गया है। कंपनी को इस अवधि में निगम तकरीबन 27 करोड़ रुपये देगा। इसके बाद भी पक्के महाल की गलियों, सड़कों पर कूड़ा फैला हुआ है। प्रमुख माने जाने वाले दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट, आरपी घाट, अस्सी घाट, तुलसी घाट को छोड़कर बाकी घाटों पर नियमित सफाई नहीं होती है। इसी तरह कियाना संस्था को 30 वार्डो में सफाई की जिम्मेदारी दी गई है। उसे हर महीने 15 लाख रुपये का भुगतान किया जा रहा है मगर कॉलोनियों और मुहल्लों में गंदगी का ढेर है। वहीं पावर ग्रिड की ओर से इकोपाल को 25 वार्डो में सफाई के लिए 55 लाख रुपये हर महीने के भुगतान पर लगाया गया है। फिर भी सुंदरपुर, नरिया, तहसील, पत्रकारपुरम कालोनी, छित्तूपुर, जय प्रकाश नगर औरंगाबाद, मछोदरी में कचरे की भरमार लगी है।