स्थानीय निकाय चुनाव में प्रदेश सरकार के विधि एवं न्याय राज्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी वोट नहीं दे पाएंगे। वजह, मतदाता सूची में उनका नाम ही नहीं है। सूची में उनके परिवार के लोगों के नाम भी नहीं हैं।
इस बात की जानकारी होते ही आननफानन में बुधवार को बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सर्वे करने वाले पर्यवेक्षक और बीएलओ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही, मंत्री का नाम छूटने के मामले की जांच शुरू कर दी है।
पिछले दिनों बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर सर्वे किया गया। वार्ड संख्या 27 बिरदोपुर के बूथ संख्या 327 के लिए प्राथमिक विद्यालय हरपालपुर की सहायक अध्यापक भुवनेश्वरी को बीएलओ और प्रधानाध्यापक हरेंद्र कुमार को पर्यवेक्षक बनाया गया था।
11 सितंबर से लेकर तीन अक्तूबर तक घर-घर जाकर मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का अभियान चलाया गया। बावजूद इसके इसी वार्ड में रह रहे राज्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी और उनके परिवारवालों के नाम मतदाता सूची में नहीं हैं।
बीएलओ और पर्यवेक्षक की इस लापरवाही पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। पर्यवेक्षक हरेंद्र कुमार को बीआरसी चोलापुर से संबद्ध कर दिया गया है। बीएसए बीबी चौधरी ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी बनाई है।
कमेटी को 15 दिन में जांच रिपोर्ट देनी है। बीएसए का कहना है कि सभी बीएलओ और पर्यवेक्षक से पहले ही ताकीद की गई थी कि सर्वे के दौरान सांसद, पूर्व सांसद, विधायक, पूर्व विधायक, पार्षद व पूर्व पार्षद का नाम किसी भी हाल में न छूटने पाए, बावजूद इसके इतनी बड़ी लापरवाही की गई।