निरीक्षण में मिली थी कमी
जांच में पाया गया कि रजिस्टर में प्राथमिक संवर्ग में 68 और उच्च प्राथमिक संवर्ग में 73 बच्चों की उपस्थिति अधिक दर्ज की गई थी। इससे एक ही दिन में 1,099 रुपये के कंवर्जन कॉस्ट का गलत भुगतान और 17 किलो खाद्यान्न का गलत उपयोग किया गया।
342 छात्रों की कुल संख्या होने के बावजूद, केवल 12 किलो चावल और उसके अनुपात में सब्जियां इस्तेमाल की गईं, जो निर्धारित मात्रा से कम था। रिपोर्ट में विद्यालय से 20-25 ट्री गार्ड, 7 साइकिल और हैंडपंप के पाइप गायब पाए गए।
प्रभार के लिए विवाद
जांच में यह भी सामने आया कि प्रधानाध्यापक का प्रभार वरिष्ठता क्रम में छठीं पायदान पर आने वाली शैल कुमारी को दिया गया था, जबकि दो वरिष्ठ शिक्षिकाओं के इन्कार के बाद तीसरे स्थान पर मौजूद शीला यादव इस पद के लिए तैयार थीं। शैल कुमारी ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी के आदेश के बावजूद शीला यादव को प्रभार नहीं सौंपा।
जांच अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में शैल कुमारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाया। रिपोर्ट में कहा गया है कि उनका कार्य और व्यवहार शिक्षक आचरण नियमावली और कर्मचारी आचरण नियमावली के खिलाफ है। इन निष्कर्षों के आधार पर, शैल कुमारी को निलंबित कर उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। खंड शिक्षा अधिकारी हरहुआ को जांच अधिकारी सौंपा गया है।