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स्मृति शेष: पूजन परंपरा पर PhD की, काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए जेल भी गए महंत डॉ. कुलपति तिवारी

Thu, 27 Jun 2024 11:48 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी के निधन पर पीएम मोदी व सीएम योगी ने दुख जताया। सीने में दर्द के बाद कुलपति तिवारी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। महंत आवास टेढ़ीनीम से मणिकर्णिका घाट के लिए अंतिम यात्रा निकली तो भारी भीड़ उमड़ पड़ी। 
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी (70) के सीने में बुधवार को तेज दर्द हुआ। घबराहट होने लगी। इसके बाद परिजनों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। इसकी सूचना से परिजनों के साथ ही शहर के लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। उनकी अंतिम यात्रा रात आठ बजे टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास से मणिकर्णिका घाट के लिए निकली। अंतिम यात्रा में मठ-मंदिरों के महंत, सेवईत और पुजारी शामिल हुए। इकलौते बेटे पं. वाचस्पति तिवारी ने उन्हें मुखाग्नि दी।

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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी 31 वर्षों से काशी विश्वनाथ मंदिर की परंपराओं का निर्वहन कर रहे थे। सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर काशी विश्वनाथ का झूलनोत्सव, दीपोत्सव, अन्नकूट कराते थे। बसंत पंचमी पर बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव, महाशिवरात्रि पर विवाहोत्सव और अमला एकादशी पर बाबा के गवना के उत्सव रंगभरी पर काशी विश्वनाथ मंदिर में निभाई जाने वाली परंपराओं का निर्वहन अनवरत कर रहे थे।

डॉ. कुलपति तिवारी ने बीएचयू से 1980 में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की पूजन परंपरा पर पीएचडी की थी। वर्ष 1983 में विश्वनाथ मंदिर के अधिग्रहण के बाद सरकारी नीतियों का विरोध करने के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। उनका जन्म 10 जनवरी 1954 को हुआ था। बालक की वैभवशाली जन्मकुंडली देखकर ज्योतिषाचार्य दादा काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत पं. महावीर प्रसाद तिवारी ने उनका नाम कुलपति रखा। चार वर्ष की अवस्था में बसंत पंचमी तिथि पर बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव और कुलपति तिवारी का शिक्षारंभ संस्कार विश्वनाथ मंदिर के ठीक सामने स्थित महंत आवास में एक साथ हुआ। श्री काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के बाद सरकार ने नौ करोड़ रुपये महंत परिवार को देकर उस आवास को श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में समाहित कर लिया।

सनातन प्राथमिक विद्यालय से शुरू हुई प्राथमिक शिक्षा

छह वर्ष की उम्र में कालिका गली स्थित श्रीविश्वनाथ सनातन प्राथमिक विद्यालय से उन्होंने आधुनिक शिक्षा का विधिवत आरंभ किया। यहां कक्षा पांच तक की शिक्षा प्राप्त करने के उपरांत कुलपति तिवारी ने कमच्छा स्थित सेंट्रल हिंदू स्कूल (सीएचएस) में प्रवेश लिया। कक्षा छह से दस तक की परीक्षा में प्रतिवर्ष सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी रहने वाले कुलपति तिवारी ने उच्च शिक्षा के लिए काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। उनके पिता डॉ. कैलाशपति तिवारी ने उनको सामवेद के दस अक्षर वाले मंत्र से दीक्षित किया। मंत्र दीक्षा की यह परंपरा सन 1659 से लिंगिया पं. नारायण महाराज के समय से महंत परिवार में चली आ रही है।
 
पिता की मृत्यु के बाद संभाला महंत का दायित्व
सात मार्च 1993 को पिता डॉ. कैलाशपति तिवारी के निधन के उपरांत डॉ. कुलपति ने काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत का दायित्व संभाला। महंत की गद्दी पर आसीन होने के बाद श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर से जुड़ी लोक परंपराओं पर आधारित वार्षिक आयोजनों को और भव्यता प्रदान की।

काशी के लिए अपूरणीय क्षति : पीएम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी के निधन पर शोक जताया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लिखा कि काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी के निधन का दुखद समाचार प्राप्त हुआ। डॉ. कुलपति ने दीर्घकाल तक बाबा विश्वनाथ की अनन्य भाव से सेवा की और आज बाबा के चरणों में लीन हो गए। उनका शिवलोकगमन काशी के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
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मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ : सीएम योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी के निधन पर शोक जताया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स और फेसबुक पर लिखा कि वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी जी का गोलोकगमन अत्यंत दु:खद है। मेरी ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि! मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। बाबा श्री विश्वनाथ जी पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें।
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