भक्तों ने लगाए जयकारे
साधु संन्यासियों द्वारा हल्दी अर्पित किए जाने के बाद हल्दी की रस्म महिलाओं ने पूरी की। एक तरफ मंगल गीतों का गान हो रहा था दूसरी तरफ गौरा को हल्दी लगाई जा रही थी। ढोलक की थाप और मंजीरे की खनक के बीच शिव-पार्वती के मंगल दांपत्य की कामना पर आधारित गीत गाए गए।
हल्दी की रस्म के बाद नजर उतारने के लिए साठी क चाऊर चूमिय चूमिय... गीत गाकर महिलाओं ने भगवान शिव की रजत मूर्ति को चावल से चूमा। बाबा के तेल-हल्दी की रस्म दिवंगत महंत डाॅ. कुलपति तिवारी की पत्नी मोहिनी देवी के सानिध्य में हुई। पूजन अर्चन का विधान उनके पुत्र पं. वाचस्पति तिवारी ने पूर्ण किए।
बाबा को खास बनारसी ठंडई, पान और पंचमेवा का भोग लगाया गया। इससे पूर्व बाबा का विशेष राजसी-स्वरूप में शृंगार संजीव रत्न मिश्र ने किया। गौरा सदनिका के श्री काशी विश्वनाथ डमरूदल सेवा समिति के पागल बाबा और मोनू बाबा के नेतृत्व में डमरू वादन कर माहौल भक्तिमय बना दिया।