1962 के बाद से कभी भी भगवा खेमे में जीत की खुशी नहीं दौड़ी। यहां तक कि लोकसभा चुनाव में भी पार्टी हमेशा यहां से पिछड़ती रही है। अगर मनोज सिंह इस बार जीत दर्ज करने में कामयाब रहे तो वह भाजपा के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।
निर्दल उम्मीदवार धनंजय सिंह रारी से दो बार विधायक रहे। पहली बार वर्ष 2002 में भी वह निर्दल ही चुनाव जीते थे। इसके बाद वर्ष 2007 में जदयू के सिंबल पर निर्वाचित हुए। वर्ष 2009 के उपचुनाव में पिता राजदेव सिंह बसपा से निर्वाचित हुए। वर्ष 2012 में पत्नी जागृति सिंह निर्दल तो वर्ष 2017 में वह खुद निषाद पार्टी के सिंबल पर मैदान में उतरे थे। कड़ी टक्कर के बाद भी वह जीत दर्ज नहीं कर सके। अगर धनंजय सिंह को जीत मिली तो वह निर्दल उम्मीदवार के रुप में चुनाव जीतने वाले मल्हनी के पहले विधायक होंगे। इससे पहले रारी में भी उन्होंने ही निर्दलीय चुनाव जीता था।