बनारस उत्सवों का शहर है। यहां विभिन्न वर्ग और समाज लगातार कोई न कोई उत्सव मनाते हैं। उन्हीं में एक है माहेश्वरी समाज। काशी में माहेश्वरी समाज के लोग ढाई सौ सालों से निवास कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अपने समाज के सबसे बड़े पर्व महेश नवमी की जानकारी नहीं थी। 66 वर्ष पहले उन्हें इसकी जानकारी हुई। तब से समाज के लोग धूमधाम से इसे मनाते हैं।
अखिल भारतीय माहेश्वरी महासभा का गठन सवा सौ साल पहले हुआ। तब से देशभर में महेश नवमी का आयोजन शुरू हुआ। इस संगठन के पूर्वी उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष श्रीराम माहेश्वरी ने बताया कि महेश नवमी के दिन ही माहेश्वरी समाज का उद्भव हुआ था। मगर इस दिन उत्सव देश में महासभा के गठन के बाद मनाना शुरू हुआ। बनारस में इसकी शाखा (माहेश्वरी परिषद) करीब 66 साल पहले शुरू हुई। फिर इसकी उसके विविध प्रकार बने।
10 साल पहले तक सामूहिक रूप से भगवान महेश की पूजा सहित विविध अनुष्ठान होते थे। मगर संगठन ने अभियान चलाकर इसको माहेश्वरी समाज के घरों तक पहुंचाया। अब घर-घर में भगवान महेश का पूजन-अर्चन और स्तुति होती है। इसके अलावा पकवान बनाए जाते हैं। लोग नए कपड़े पहनकर एक-दूसरे को बधाई देते हैं। छोटे-बड़ों से आशीर्वाद लेते हैं और बड़े बच्चों को त्योहारी (उपहार) देते हैं। परिषद के प्रचार मंत्री गौरव राठी ने बताया कि इस बार महेश नवमी 15 जून को है। इस दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम, रक्तदान, पर्यावरण संरक्षण जागरूकता आदि कार्यक्रम होंगे।