महाव्रत में महिलाएं बाएं व पुरुष दाहिने हाथ में 17 गांठ का धागा धारण करते हैं। इसमें अन्न का सेवन वर्जित होता है। केवल एक वक्त बिना नमक का फलाहार किया जाता है। 17 दिन तक चलने वाले इस अनुष्ठान का उद्यापन 9 दिसंबर को होगा।
उस दिन धान की बालियों से माता के परिसर को सजाया जाएगा। पूर्वांचल के किसान भी अपनी फसल का पहला धान मां को अर्पित करते हैं। महिलाएं माता का दर्शन व फेरी लगाकर अपने व्रत का उद्यापन करती हैं। 10 दिसंबर को धान की बाली प्रसाद रूप में भक्तों में वितरित किया जाएगा।