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काशी विद्यापीठ: बैक पेपर के विद्यार्थियों को नहीं देनी होगी परीक्षा, मगर एक शर्त भी, देना होगा इस आशय का शपथ पत्र

Wed, 30 Jun 2021 11:56 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

ऐसे विद्यार्थियों को इस शर्त के साथ परीक्षा में न बैठने और अंक देने की सुविधा दी गई है कि उन्हें इस आशय का शपथ पत्र, प्रमाण पत्र देना होगा कि उन्होंने इस अवधि में कोई अन्य उपाधि नहीं ली है। यह निर्णय भविष्य केवल इसी सत्र के लिए मान्य होगा। 
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ और उससे संबद्ध कॉलेजों में बैक पेपर के विद्यार्थियों को परीक्षा नहीं देनी होगी। ऐसे विद्यार्थियों को पिछली परीक्षा में मिले नंबर के औसत अंक देकर बैक पेपर का अंक दिया जाएगा। इसके बाद भी कोई विद्यार्थी संबंधित पेपर में फेल होता है तो उस पेपर के अनुसार, न्यूनतम उत्तीर्ण अंक प्रदान कर परिणाम जारी किया जाएगा। मंगलवार को परीक्षा समिति की बैठक में इसका फैसला हुआ। 

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काशी विद्यापीठ में कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी की अध्यक्षता में हुई बैठक में परीक्षा से जुड़े कई बिंदुओं पर चर्चा की गई। कुलसचिव डॉ. साहब लाल मौर्य ने बताया कि बैक पेपर परीक्षा में बैठने के लिए अर्ह ऐसे विद्यार्थी जिन्होंने इसके लिए विश्वविद्यालय के पोर्टल पर बैक परीक्षा का आवेदन किया है।

ऐसे विद्यार्थियों को इस शर्त के साथ परीक्षा में न बैठने और अंक देने की सुविधा दी गई है कि उन्हें इस आशय का शपथ पत्र, प्रमाण पत्र देना होगा कि उन्होंने इस अवधि में कोई अन्य उपाधि नहीं ली है। यह निर्णय भविष्य केवल इसी सत्र के लिए मान्य होगा। 

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परीक्षा समिति के फैसले

- एमबीबीएस, बीएएमएस, बीएससी नर्सिंग, पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग, बीपीटी पाठयक्रम की परीक्षा 30 जुलाई से 15 अगस्त के बीच होगी। 
- विश्वविद्यालय में प्रायोगिक परीक्षाएं नहीं होंगी। मौखिकी परीक्षाएं जरूरत के हिसाब से ऑनलाइन होंगी। 
- जिन पेपर में प्रायोगिक परीक्षा जरूरी होगी, उसमें 60 प्रतिशत अंक लिखित परीक्षा में मिले अंक और 40 प्रतिशत आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर मिलेंगे। 
- व्यक्गित परीक्षार्थियों को लिखित परीक्षा में मिले अंक में 33 प्रतिशत बढ़ाकर प्रायोगिक परीक्षा का नंबर मिलेगा। 

भगवानदास की स्मृति में मिलेगा स्वर्ण पदक
काशी विद्यापीठ में मंगलवार को हुई कार्यपरिषद की बैठक में भी विश्वविद्यालय से जुड़े अहम बिंदुओं पर चर्चा की गई। इसमें भारतरत्न डॉ. भगवानदास की स्मृति में स्वर्ण पदक देने का निर्णय लिया गया। डॉ. भगवानदास के वंशज बीएचयू एनेस्थीसिया विभाग के प्रो. पुष्कर रंजन ने इसके लिए पत्र दिया था। कार्यपरिषद ने सर्वोच्च अंक पाने वाले छात्र को स्वर्ण पदक देने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई। साथ ही विश्वविद्यालय में शैक्षणिक पदों पर सीधी भर्ती के माध्यम से नियुक्ति के लिए साक्षात्कार पारदर्शिता के लिए पूर्व में राजभवन से आए प्रावधानों को लागू करते हुए कार्रवाई करने का निर्णय भी लिया गया।
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