स्वामी पूर्णानंदपुरी ने बताया कि शिवरात्रि चतुर्दशी तिथि एक मार्च को प्रात: 3:16 मिनट से 2 मार्च रात्रि एक बजे तक रहेगी। शिवरात्रि पर धनिष्ठा नक्षत्र में परिधि नामक योग बन रहा है और इस योग के बाद शतभिषा नक्षत्र शुरू हो जाएगा। वहीं परिध योग के बाद से शिव योग शुरू हो जाएगा।
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इसके साथ ही शिव पूजन के समय केदार योग रहेगा। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसके बाद भोलेनाथ ने वैराग्य का जीवन त्यागकर गृहस्थ जीवन अपनाया था। इस दिन व्रत रखने से सौभाग्य में वृद्धि होती है।
महाशिवरात्रि पर शिव बरात में भगवान शिव के आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के भी दर्शन होंगे। 40वें वर्ष में निकलने वाली शोभायात्रा में 40 दोहों में पूरी रामायण को शिव बरात में जीवंत किया जाएगा। काशी विश्वनाथ धाम को समर्पित शिव बरात में होली के विविध रंग भी बिखरेंगे। शिव बरात को देखने के लिए देश भर से श्रद्धालु बनारस आते हैं। बरात में बच्चे झांकियों के जरिये बड़ों को मतदान के लिए प्रेेरित करेंगे।