अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकर पुरी ने कहा कि काशी से उनका गहरा लगाव था। वह 13 अखाड़ों के प्रतिनिधि थे और कुंभ में उनका हमेशा सहयोग मिलता था। घटना से मन आहत है। अगर उन्होंने एक बार भी अपनी पीड़ा कही होती तो हम लोग उनका पूरा सहयोग करते। भगवान उनकी आत्मा को शांति दें।
अखिल भारतीय व्यास संघ के अध्यक्ष महंत बालक दास ने कहा कि महंत नरेंद्र गिरि के निधन से संत समाज ही नहीं सनातन धर्मावलंबियों को क्षति हुई है। वह आत्महत्या करने वाले संत नहीं थे। कहीं ना कहीं उनके साथ कुछ गलत हुआ है। घटना से साजिश की बू आ रही है और जांच के बाद इसका खुलासा होगा। अश्रुपूरित श्रद्धांजलि।
काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व न्यास अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने कहा कि अखाड़ा परिषद का आकस्मिक निधन स्तब्धकारी है। वह सनातन धर्म ध्वजा वाहक थे और उनके जाने से जो रिक्तता आई है उसको भरना कठिन है। भगवान शिव से प्रार्थना है कि वह उनको अपने चरणों में स्थान दें। घटना की उच्चस्तरीय जांच हो।
काशी विद्वत परिषद ने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी के आकस्मिक निधन की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि उन्होंने आत्महत्या की या उन्हें विवश किया। इसका पता लगाने के लिए घटना की न्यायिक जांच होनी चाहिए।
काशी विद्वत परिषद को जानकारी मिली है कि महंत नरेंद्र गिरि का शव संदिग्ध परिस्थितियों में श्रीमठ बाघंबरी गद्दी में फंदे से लटका मिला है। सुसाइड नोट मिलने की बात भी कही जा रही है। सुसाइड नोट और उसमें उल्लिखित तथ्यों की भी विवेचना करने की मांग परिषद ने की है।
महामंत्री प्रो. द्विवेदी ने कहा कि इस घटना का जुड़ाव पिछली वारदातों से हो सकता है। जुलाई महीने में मुख्यमंत्री से मिलकर लखनऊ से लौटते वक्त हाईवे पर उनकी इनोवा का दुर्घटनाग्रस्त होना, पूर्व महंत सचिव महंत आशीष गिरि की संदिग्ध मौत का प्रकरण भी इसके पीछे वजहें हो सकती हैं।