भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट किया- बनारस विश्व हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक, महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक एवं शिक्षाविद, भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की जयंती पर उन्हें शत्-शत् नमन। युवाओं में शिक्षा की अलख जगाकर राष्ट्र-प्रेम जाग्रत करने हेतु समर्पित उनका जीवन अनुकरणीय है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट किया- महान स्वाधीनता संग्राम सेनानी, उत्कृष्ट शिक्षाविद, भारतीय संस्कृति के जीवंत संवाहक केन्द्र 'काशी हिन्दू विश्वविद्यालय' के संस्थापक, 'भारत रत्न' महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी को उनकी जयंती पर कोटिश: नमन। 'महामना' का व्यक्तित्व एवं त्यागमय जीवन हमें सदैव प्रेरणा देता रहेगा।
2014 में महामान को मिला भारत का सर्वोच्च सम्मान
पंडित मदन मोहन मालवीय का जन्म 25 दिसंबर 1861 को प्रयागराज में हुआ था। वर्ष 1909 में उन्होंने कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन की अध्यक्षता की थी। एशिया के सबसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालय बीएचयू की स्थापना में भी उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई। उन्हें वर्ष 2014 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया था।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय का जन्म पौष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी (25 दिसंबर,1861) को हुआ था। अपने संस्थापक की जयंती विश्वविद्यालय पूरी श्रद्धा से मनाता रहा है। यूं तो इसके साक्षी महामना खुद भी रहे लेकिन उनके देहावसान के बाद से ही हिंदी तिथि के अनुसार मालवीय जयंती का शुभारंभ प्रतिपदा से हो जाता है।
पंडित मदन मोहन मालवीय के रहते हुए उनकी 75वीं जयंती बेहद खास थी। महामना का 75वां जन्मोत्सव विश्वविद्यालय स्थित श्री विश्वनाथ मंदिर में 1937 में मनाया गया था। विश्वविद्यालय और काशी के गणमान्य लोगों ने इसे मालवीय के सम्मान में आयोजित किया था। महामना को एक ‘अभिनंदन पत्र’ और सुंदर देशी घड़ी भेंट की गई थी, जिसमें भारत की आकृति बनी थी।
महामना ने उस वक्त जन समूह को संबोधित करते हुए विश्वनाथ मंदिर के निर्माण में सहयोग करने की अपील की थी। मालवीय को श्रीमद्भागवत और गीता ये दोनों ग्रंथ प्रिय थे, इसलिए उनकी जयंती पर मालवीय भवन में 1946 से ही श्रीमद्भागवत पारायण और कथा कराई जा रही है। वेदों और मंत्रों से सात दिन तक ये भवन गूंजता है। उनकी स्मृति में मालवीय स्मृति पुष्प प्रदर्शनी भी पिछले करीब पचास वर्षों से हो रही है।
विश्वविद्यालय के निर्माण और विकास दोनों के साक्षी मालवीय भवन बीएचयू की हृदयस्थली है। मालवीय जी से अगर आत्मीय दर्शन करना हो तो वे यहां जरूर मिलेंगे। यहां की हर दर-ओ-दीवार उनके होने का एहसास कराएगी। प्रवेश करते ही मालवीय की मूर्ति, जिसे देख हर कोई यहां अपने शीष जरूर झुकाता है। बीएचयू की स्थापना के बाद से महामना ने सबसे ज्यादा वक्त यहीं गुजारा। मालवीय भवन के ऊपर लाइब्रेरी में मालवीय जी से जुड़े तमाम संग्रह मौजूद हैं। अब इस मालवीय भवन को हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के रूप में विकसित करने की योजना है।