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सख्त कार्रवाई: वाराणसी में व्यापारी से पांच हजार घूस लेने का आरोपी दरोगा बर्खास्त, हफ्ते भर में दो एसआई पर गिरी गाज

Sat, 25 Dec 2021 11:10 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी की कमिश्नरेट  पुलिस में हफ्ते भर के अंदर दो उप निरीक्षकों को बर्खास्त किया गया है।  पांच हजार रुपए घूस लेते हुए रंगे हाथ पकड़े गए दरोगा महेश सिंह को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
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यूपी पुलिस - फोटो : Social Media
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विस्तार
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तीन साल पूर्व वाराणसी के सिगरा थाना के सोनिया चौकी प्रभारी रहे महेश सिंह को व्यापारी से पांच हजार रुपये घूस लेने के मामले में पद से बर्खास्त कर दिया गया। महेश सिंह की तैनाती फिलहाल जौनपुर में थी। वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस की हफ्ते भर के अंदर यह दूसरी कार्रवाई है। इसके पहले महिला थाने में  उप निरीक्षक रही गीता देवी को 20 हजार घूस लेने के मामले में बर्खास्त किया जा चुका है।

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कूरियर कंपनी की फ्रेंचाइजी चलाने वाले कबीरचौरा स्थित जालपा देवी रोड निवासी राजकुमार गुप्ता ने धोखाधड़ी मामले में सिगरा थाना अंतर्गत सोनिया चौकी इंचार्ज महेश सिंह के पास गए तो पैसे की मांग की गई। कई बार पैसे की मांग होने से त्रस्त राजकुमार गुप्ता ने इसकी शिकायत भ्रष्टाचार निवारण वाराणसी इकाई से की।

रंगे हाथ पकड़े गया था दरोगा 

शिकायत के आधार पर एंटी करप्शन टीम ने पांच हजार रुपये  देकर राजकुमार को चौकी पर भेजा। जहां नोटों की गड्डी थामते ही चौकी इंचार्ज महेश  सिंह को एंटी करप्शन टीम ने रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। कैंट थाने में एसआई महेश सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

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इस मामले की जांच  रिपोर्ट पर अपर पुलिस आयुक्त अपराध व मुख्यालय सुभाष चंद्र दुबे ने बर्खास्त का आदेश जारी किया। आदेश की प्रति जौनपुर पुलिस अधीक्षक को भी भेज दी गई है।  सुभाष चंद्र दुबे ने बताया कि पुलिस  जैसे अनुशासित बल का हिस्सा होने के बावजूद अपचारी उप निरीक्षक का यह कृत्य  पुलिस विभाग की छवि धूमिल करने और भ्रष्ट आचरण से पुलिस बल की आम जनता में  विश्वसनीयता कम करने का परिचायक है।

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दरोगा  द्वारा आमजन का रक्षक होते हुए भक्षक का कार्य किया गया है, जो एक अति गंभीर कदाचार है।  यदि ऐसे दरोगा  को पुलिस बल में बनाए रखा जाता है  तो इसका कुप्रभाव अन्य पुलिसकर्मियों पर पडे़गा। साथ ही समाज में गलत  संदेश जाएगा। वहीं उप निरीक्षक द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण आधारहीन, बलहीन, असत्य, निराधार होने के कारण स्वीकार योग्य नहीं है।
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