मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य को लेकर सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं, बच्चों के इलाज से जुड़ी सुविधाएं बढ़ाने का दावा भले ही किया जा रहा है, लेकिन हकीकत में पूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। जिला महिला अस्पताल कबीरचौरा में कई जरूरी जांच नहीं होने से इन दिनों गर्भवती महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ ऐसी महिलाएं भी हैं, जिन्हें बाहर से जांच करवाना पड़ रहा है।
जिला महिला अस्पताल में हर दिन ओेपीडी में 300 से अधिक गर्भवती महिलाएं परामर्श और जांच के लिए आती हैं। इसमें शहरी और ग्रामीण इलाकों के साथ ही आसपास के जिलों की भी महिलाएं रहती हैं। ओपीडी में परामर्श के बाद चिकित्सक जांच तो लिख रहे हैं, लेकिन पैथलॉजी लैब में जांच नहीं हो पा रही है। जो जांच नहीं हो पा रही है, उनमें बायोकेमिस्ट्री से जुड़ी जांच है, जो कि गर्भवती महिलाओं के इलाज में जरूरी मानी जाती हैं। महिलाएं पर्चा लेकर लैब में पहुंच रही हैं, लेकिन वहां से उन्हें लौटा दिया जा रहा है। सोमवार को भी लैब के बाहर पर्चा लेकर महिलाएं बैठी रहीं। जैसे ही पता चला कि बायोकेमिस्ट्री से जुड़ी जांच नहीं हो पाएगी, निराश लौटना पड़ा।
नहीं हो रहीं ये जांच
एलएफटी- लिवर फंक्शन टेस्ट
केएफटी- किडनी फंक्शन टेस्ट
यूरिया, शुगर, किडनी
एसजीपीटी-सिरम ग्लूटामेट पाइरूवेट ट्रासनामिनाज
एसजीओटी-सिरम ग्लूटामेट आक्सालोआसिटेट ट्रासनामिनाज
बायोके मिस्ट्री से जुड़ी मशीन खराब होने की वजह से जांच नहीं हो पा रही है। मशीन बनवाने के लिए संबंधित कंपनी के इंजीनियरों से बात की गई है। इसी सप्ताह में मशीन बन जाएगी। इसके बाद ही जांच शुरू हो पाएगी। - डॉ. एके श्रीवास्तव, एसआईसी, जिला महिला अस्पताल