मां अन्नपूर्णा की रथयात्रा का भव्य स्वागत
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मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा के स्वागत के लिए जिले की सीमा पर लोग देर रात तक इंतजार करते रहे। जैसे ही माता की प्रतिमा का रथ शहर की सीमा में पहुंचा, पूरा वातावरण हर-हर महादेव के जयघोष के साथ गूंज उठा। मां के दर्शन के लिए रविवार की रात श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ उमड़ी।
देर रात तक जगह-जगह पुष्प वर्षा हुई। विलंब से पहुंचने के बावजूद देवी के दर्शन के लिए लोग धैर्यपूर्वक खड़े रहे। भाजपा व कई सामाजिक व सांस्कृतिक संगठनों ने मां अन्नपूर्णा के भव्य स्वागत के लिए पंडाल व मंच व्यवस्था के साथ भजन-कीर्तन भी किया। दुर्गाकुंड स्थित मंदिर में कलाकार रातभर माता के स्वागत में भजन-कीर्तन करते रहे।
दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर में मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा के रात्रि विश्राम की व्यवस्था का अधिकारियों ने जायजा लिया। एडीएम सिटी गुलाब चंद्र के नेतृत्व में एसीएम तृतीय गिरीश चंद्र द्विवेदी ने तैयारियों को परखा। मूर्ति स्वागत समिति से जुड़े अक्षयवर सिंह ने बताया कि मूर्ति उत्तर दिशा स्थित (कुंड की तरफ) बरामदे में पश्चिमाभिमुख रखी जाएगी।
दर्शनार्थी पश्चिम दिशा में रखी गई सीढ़ी के सहारे बरामदे में प्रवेश करके माता की प्रतिमा का दर्शन करेंगे और दर्शन के बाद दक्षिण दिशा की ओर स्थित पक्की सीढ़ी से नीचे उतर जाएंगे। एडीएम सिटी व एसीएम तृतीय ने बताया कि जहां मूर्ति रखी जायेगी वहां बैरिकेडिंग की गई है।
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहेगा। स्वागत समिति के संयोजक प्रमोद कुमार मिश्र के अनुसार मंदिर में इस दौरान रात भर विभिन्न भजन मंडलियां माता की स्तुति में भजन प्रस्तुत करेंगी। अगले दिन गाजे बाजे के साथ मूर्ति की शोभायात्रा निकाली जाएगी।
बलुआ पत्थर से बनी मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा 18वीं सदी की बताई जाती है। मां एक हाथ में खीर का कटोरा और दूसरे हाथ में चम्मच लिए हुए हैं। प्राचीन प्रतिमा कनाडा कैसे पहुंची, यह राज आज भी बरकरार है। लोगों का कहना है कि दुर्लभ और ऐतिहासिक सामग्रियों की तस्करी करने वालों ने प्रतिमा को कनाडा ले जाकर बेच दिया था। काशी के बुजुर्ग विद्वानों को भी मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा के गायब होने की जानकारी नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 नवंबर 2020 को मन की बात कार्यक्रम में देश के लोगों को मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा कनाडा में मिलने की जानकारी दी थी। कहा था कि हर एक भारतीय को यह जानकर गर्व होगा कि मां अन्नपूर्णा की सदियों पुरानी प्रतिमा कनाडा से भारत वापस लाई जा रही है। यह करीब 108 साल पहले वाराणसी के एक मंदिर से चोरी हुई थी।
करीब 100 साल बाद अपने धाम लौट रही मां अन्नपूर्णा के आगमन को जौनपुर के लोगों ने अपनी श्रद्धा से ऐतिहासिक बना दिया। मां के दर्शन के लिए रविवार की रात श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ उमड़ी। देर रात तक जगह-जगह पुष्प वर्षा हुई। माता के दर्शन को हर कोई बेताब नजर आया।
कई घंटे विलंब से पहुंचने के बावजूद देवी के दर्शन के लिए लोग धैर्यपूर्वक खड़े रहे। मूर्ति का जगह-जगह लोगों ने दर्शन किया। स्वागत समारोहों और श्रद्धालुओं की पुष्प वर्षा के बीच मां अन्नपूर्णा पुनर्स्थापना यात्रा का लोग घंटों इंतजार करते रहे। भाजपा व कई सामाजिक व सांस्कृतिक संगठनों ने मां अन्नपूर्णा के भव्य स्वागत के लिए पंडाल व मंच व्यवस्था के साथ कीर्तन-भजन भी किया।
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